जानिए उस ड्रग इंस्पेक्टर को, जिससे मिले 4.11 करोड़ कैश:पटना में डायरेक्टर बन निजी कॉलेज भी चलाता है जीतेंद्र, 'साहेब' के नाम से है चर्चित

गया3 महीने पहले
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जीतेंद्र के ठिकाने से करीब 4 करोड़ रुपए नगद बरामद किया गया। - Dainik Bhaskar
जीतेंद्र के ठिकाने से करीब 4 करोड़ रुपए नगद बरामद किया गया।

ड्रग इंसपेक्टर के पद का दुरुपयोग करते हुए नाजायज तरीके से करोड़ों रुपए की चल और अचल संपत्ति अर्जित करने वाला जितेंद्र सिंह शिक्षा माफिया भी हैं। वह एक निजी कॉलेज भी चलाता है। उस कॉलेज का वह खुद डायरेक्टर भी है। कॉलेज पटना में ही है। वह बिहार फार्मेसी के नाम से प्रसिद्ध है। इस कॉलेज से भी वह करोड़ों रुपए वर्षों से कमा रहा था। विभाग में उसका गजब का दबदबा था। जीतेंद्र लोगों के बीच 'साहेब' के नाम से चर्चित है।

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दीवान और आलमारी में भरी थी नोटों की गडि्डयां

दरअसल, पटना (एरिया-5) में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर जीतेन्द्र कुमार ने इतना कमाया है, इसका अंदाजा विजिलेंस ब्यूरो को भी नहीं था। शनिवार को विजिलेंस की टीम ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की तो दीवान और आलमारी में नोटों की गडि्डयां देख कर दंग रह गई। नोट गिनने की दो मशीनें मंगवाईं, लेकिन नमी नहीं रहने से जकड़े हुए नोटों को गिनते-गिनते दोनों मशीनें ठप हो गईं और गिनती बंद कर देनी पड़ी। नोटों को 3-4 चेन वाले बैग में ठूंस-ठूंस कर रखा गया था। फिर गिनती शुरू हुई जो देर रात 12 बजे तक चली। कुल 12 घंटे की गिनती में करीब 4.11 करोड़ कैश मिले।

जीतेंद्र के ठिकानों पर छापेमारी में मिले रुपए।
जीतेंद्र के ठिकानों पर छापेमारी में मिले रुपए।

जितेंद्र सिंह जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड के दरियापुर गांव का रहने वाला है। खास बात यह भी है कि जितेंद्र सिंह के विरुद्ध उसके गांव के लोग थोड़ा भी मुंह नहीं खोल रहे हैं। सभी ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। गांव में भी उसे लोग बीते कुछ वर्षों से 'साहेब' ही कहने लगे थे। गांव से भी उसका ठीक-लगाव रहा है। जहानाबाद के हुलासगंज में भी उसका मकान है। यहां उसके बड़े भाई रहते हैं।

दिल से कभी सरकारी नौकरी नहीं की

ड्रग इंस्पेक्टर अपनी ड्यूटी से ज्यादा वक्त बिहार फार्मेसी कॉलेज में दिया करता था। कॉलेज की देख-रेख के लिए दो वर्ष पूर्व ही उन्होंने अपना पटना ट्रांसफर करवाया था। ताकि कॉलेज की अच्छी से देखभाल की जा सके। बिहार फार्मेसी कॉलेज नवादा के टेटारु गांव के रहने वाले राजेंद्र शर्मा का है। उन्होंने ही इन्हें डायरेक्टर बनाया था। बाद में जितेंद्र सिंह शेयर होल्डर भी हो गया था।

गया स्थित इसी अपार्टमेंट में ड्रग इंस्पेक्टर का दो फ्लैट है।
गया स्थित इसी अपार्टमेंट में ड्रग इंस्पेक्टर का दो फ्लैट है।

10 साल नौकरी में ऐसी कमाई

विजिलेंस टीम सुबह साढ़े 9 बजे जब छापेमारी करने पहुंची तो ड्रग इंस्पेक्टर पत्नी के साथ एक कोचिंग में बेटी के एडमिशन के लिए गया हुआ था। जैसे ही छापे की सूचना मिली तो वह खुद तो फरार हो गया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद पत्नी और बेटी वापस घर लौट आईं। विजिलेंस के अनुसार, सुल्तानगंज वाले घर के अलावा ड्रग इंस्पेक्टर के गया के मनोरमा अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या-201 में भी छापेमारी की गई। यह फ्लैट किराया पर लगा है। इसी अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 202 में बिजली कनेक्शन भी जीतेन्द्र के नाम से है। इससे इसकी बेनामी संपत्ति होने की पूरी संभावना है।

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