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पहल:महाबोधि मंदिर के उत्तर 59,790 वर्गमीटर की खुदाई के लिए बना महाबोधि आर्कियोलोजिकल प्रोजेक्ट

गया2 महीने पहले
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  • 176.55 एकड़ में उत्खनन के बाद विकसित होगा महाबोधि विहार परिसर
  • बिहार पुरातत्व की परियोजना पर केंद्र ने यूनेस्को को दिया उत्खनन का प्रस्ताव, उत्खनन स्थल पर फूलों की क्यारी के साथ पार्क का है प्रस्ताव

यूनेस्को की अनुमति मिलने के बाद बोधगया के 176.55 एकड़ भूखंड का अधिग्रहण कर उसका पुरातात्विक उत्खनन होगा। खुदाई 59790 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित है। महाबोधि मंदिर परिसर व साइट के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक मूल्य के संरक्षण को महाबोधि आर्कियोलोजिकल प्रोजेक्ट बनाया गया है, जिसमें खुदाई की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा है। इस पर 19 करोड़ खर्च की योजना है। खुदाई मुख्य रूप से कालचक्र मैदान की होगी, जहां महाबोधि महाविहार मंदिर से सटे महाबोधि विहार दबा हुआ है।

इसकी निर्माण योजना 1892 में कनिंघम ने दी थी। संभवतः इसी कारण टूरिज्म व कला-संस्कृति मंत्रालय द्वारा यूनेस्को को 2002 में दिए गए डोजियर में कनिंघम के 1892 के मोनास्ट्री के प्लान के हिस्से को किसी भी निर्माण से मुक्त रखने को कहा गया है। 08 मीटर गहरी होगी खुदाई : महाबोधि आर्कियोलोजिकल प्रोजेक्ट के तहत 59790 वर्गमीटर की खुदाई होगी। इसे 1322 ट्रेंचेज में बांटा जाएगा। प्रत्येक ट्रेंच का आकार 10 मीटर लंबा, 10 मीटर चौड़ा व 08 मीटर गहरा होगा।

दो भागों में है प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट 36 वर्ग किमी में विस्तृत है, जिसे दो भागों में बांटा गया है-ऐतिहासिक साइट और न्यो-क्लासिकल एरिया। ऐतिहासिक साइट में 176.55 एकड़ में ऐतिहासिक टीला है, जिसकी खुदाई का प्रस्ताव है। इसका कनिंघम ने 1885 में खुदाई कर धरोहर की जांच की थी और 1892 में अपनी प्रकाशित रिपोर्ट में इसका प्लान भी दिया।

खुदाई में पहले मिल चुका है संस्कृति के सात स्तर| इ1981-81 से 1988-89 तक महाबोधि मंदिर के पश्चिम में ताराडीह में उत्खनन से संस्कृति के सात स्तरों के प्रमाण मिले हैं। पहला चरण 25वीं शती ई.पू. से 17वीं शती ई.पू. की नव प्रस्तरयुगीन सभ्यता से संबंधित है। दूसरा स्तर ताम्राश्म संस्कृति 17वीं शती ई.पू से 10वीं शती ई.पू तक, चौथे स्तर से उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भांड संस्कृति के अवशेष, पांचवें स्तर से कुषाणकालीन विशिष्ट लोहित मृद्भांड मिले हैं।

क्या-क्या बनेगा
एक ध्यान पार्क, एक संग्रहालय, बौद्ध धर्म का एक रिसेप्शन और सूचना केंद्र, भूनिर्माण संकेत के साथ विकास योजनाओं में परिकल्पना की गई है, क्योंकि इससे साइट के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक मूल्य की जानकारी मिलेगी। उत्खनन स्थल पर फूलों की क्यारी के साथ ग्रीन पार्क का भी प्रस्ताव है।

कनिंघम ने बताया इतिहास
उक्त मोनास्ट्री का पहला उल्लेख चीनी यात्री फाह्यान ने किया है। उसने बोधिवृक्ष के उत्तर में तीन महाविहारों का उल्लेख किया। बाद में 635 ई. में दूसरे चीनी यात्री ह्वेनसांग ने कहा, यहां छह वृहद कक्ष हैं। वास्तव में यहां छह कक्ष नहीं, छह महाविहार हैं। उसने इसे महाबोधि संघाराम बताया है।

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