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देशभर में कोरोना से मारे गए लोगों का सामूहिक पिंडदान:गया की फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट पर हुआ सामूहिक श्राद्ध- पिंडदान का कर्मकांड

गया11 दिन पहले
गया में सामूहिक श्राद्ध और पिंडदान का अनुष्ठान कराते पंडे।

कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए गया की फल्गू नदी के तट पर गुरुवार को सामूहिक श्राद्ध और पिंडदान किया गया। देश-दुनिया में कोरोना से मरे लोगों की आत्मा की शांति के लिए यह अनुष्ठान किया गया। शहर के फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट पर सामूहिक श्राद्ध- पिंडदान किया गया।

मंत्रोच्चारण के साथ पिंडदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। कोरोना की दूसरी लहर में जिले में ही करीब 300 लोगों की मौत अब तक हो चुकी है। मरने वालों में से कई लोगों का अंतिम संस्कार भी धार्मिक विधि-विधान से नहीं हो पाया। गुरुवार को अमावस्या का दिन होने की वजह से अंतः सलिला फल्गु के तट पर कोरोना महामारी में मारे गए लोगों के लिए पिंडदान का अनुष्ठान किया गया।

पिंडदान में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व

शिवानंद सत्संकल्प फाउंडेशन हैदराबाद और आंध्र तेलंगाना भवन के प्रमुख संयोजक मनोहर लाल व सतगुरु कंदुकुरी शिवानंद मूर्ति जी के तत्वावधान में इस सामूहिक पिंडदान का आयोजन किया गया। आंध्र तेलंगाना भवन के प्रमुख संयोजक मनोहर लाल ने कहा कि तेलंगाना भवन द्वारा पिछली आठ पीढ़ी से दक्षिण भारतीय यात्रियों के पूर्वजों के लिए पिंडदान की व्यवस्था की जा रही है। पिंडदान में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। इसलिए गुरुवार को अमावस्या तिथि होने की वजह से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

स्थानीय पंडों ने लिया पिंडदान का संकल्प

पुरोहितों ने बताया कि कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक पिंडदान व श्राद्ध कर्मकांड की प्रक्रिया पूरे विधि-विधान से की गई है, ताकि जिन लोगों की कोरोना से मृत्यु हुई है। उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो सके। वहीं, अनुष्ठान करा रहे राहुल कुमार ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान कई लोगों के शव का अंतिम संस्कार विधि-विधान से नहीं हो पाया। इसी को ध्यान में रखते हुए सामूहिक पिंडदान व श्राद्ध कर्मकांड किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रमुख पुजारी गणेश शास्त्री द्वारा पिंडदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। स्थानीय पंडों द्वारा पिंडदान का संकल्प लिया गया, ताकि कोरोना से मरने वाले लोगों की आत्मा को शांति मिल सके।

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