• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Gaya
  • Now In Just Two Hours, Microbial Infection Will Be Known, Gaya Scientist Dr. Ujjwal Has Discovered A New Technique; Complete Investigation Will Be Based On PH

रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री ने किया शोध प्रकाशित:अब मात्र दो घंटे में पता चलेगा माइक्रोबियल इंफेक्शन गया के वैज्ञानिक डॉ उज्ज्वल ने खोजी है नई तकनीक; पीएच आधारित होगी पूरी जांच

गया4 महीने पहलेलेखक: राजीव कुमार
  • कॉपी लिंक
डॉ उज्ज्वल वर्मा - Dainik Bhaskar
डॉ उज्ज्वल वर्मा

अब कम लागत व कम समय में रैपिड एंटीजन टेस्ट की तरह माइक्रोबियल इंफेक्शन की जांच होगी। स्मार्टफोन आधारित इमेज प्रोसेसिंग सिस्टम से यह संभव होगा। पीएच आधारित रंग परिवर्तन के आधार पर यह जांच होगा। लैब में कम्प्यूटर और कैमरे की मदद से माइक्रोबियल इन्फेक्शन की प्रामाणिक और शीघ्र जांच हो सकेगी।

गया के युवा वैज्ञानिक और कर्नाटक के मनिपाल इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजिनियरिंग के प्रोफेसर डॉ उज्ज्वल वर्मा की टीम ने इस नई तकनीक को विकसित की है, जिसमें फटाफट रोगाणु बैक्टीरिया की पहचान हो जाती है। प्रो वर्मा की टीम में एमआईटी के रिसर्च स्काॅलर अनुषा, प्रोफेसर मनी, प्रोफेसर प्रभु और कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मनिपाल के डॉ प्रकाश और आईआईटी खड़गपुर के डॉ नंदगोपाल सम्मिलित हैं।

कर्नाटक के मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी में कार्यरत हैं डॉ. उज्ज्वल वर्मा

कैसे करता है काम
कोविड रैपिड एंटिजन किट की तरह यह किट होगी, जिसमें काॅटन के धागों पर चीनी डालकर पता किया जाता है। इंफेक्टेड बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट को प्रभावित करता है। कल्चर डिश में डालकर कार्बोहाइड्रेट के रासायनिक परिवर्तन को कैमरे से देखा जाता है। चित्र का विश्लेषण कम्प्यूटर करता है और बैक्टीरिया की पहचान हो जाती है। एआई के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

इन रोगों की करेगी पहचान
कैंडिडा अल्बिकन्स और इशरीकिया कोलाई रोगाणुओं से मुंह, गला, आंत, आंख और योनि में संक्रमण होता है। समय रहते उपचार नहीं हुआ तो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, निमोनिया और मेनिनजाइटिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

राॅयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की पत्रिका में छपा शोध, फ्रांस से की है पीएचडी
इस नूतन विधि पर डॉ उज्ज्वल की टीम के रिपोर्ट को इस वर्ष लंदन के रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका, ऑरएससी एडवान्सेज ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। उनके इस शोध पत्र को मणिपाल मैक गिल सेन्टर फॉर इन्फेक्शस डिजीज ने बेस्ट पब्लिकेशन पुरस्कार और सम्मान के लिए चुना है। यह पुरस्कार उन्हें 18 नवंबर 2021 को एक समारोह में दिया गया। डॉ वर्मा ने पेरिस के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी विवि से फ्रेंच स्कॉलरशिप से पीएचडी करने के बाद 2014 में भारत लौटे। उन्होंने भारत आकर फ्रांसीसी कंपनी क्लीड्स के लिए तीन वर्षों तक बतौर कंप्यूटर विशेषज्ञ, कंसल्टेंसी किया।

खबरें और भी हैं...