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चुनावी मुद्दा:एक महाबोधि मंदिर को छोड़ नहीं विकसित हुए दूसरे टूरिस्ट स्पॉट

गया16 दिन पहले
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  • निरंजना नदी के सौंदर्यीकरण को 2014 में पर्यटन मंत्रालय ने दिए थे 5 करोड़, पर नहीं हुआ काम
  • टूरिस्टों का ठहराव बढ़ाने की योजना किसी भी चुनाव का नहीं बना मुद्दा

टूरिस्टों का ठहराव विकसित किए बिना टूरिज्म सेक्टर का विकास नहीं कर सकते। बोधगया की पूरी व्यवस्था टूरिज्म पर निर्भर है, बावजूद मंदिर के अलावा अन्य स्पॉट विकसित करने व टूरिस्टों का ठहराव बढ़ाने की योजना कभी भी किसी चुनाव का मुद्दा नहीं बन सका। छह साल पहले बोधगया के निरंजना नदी के रीवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण के लिए राशि का आवंटन हुआ, पर काम आगे नहीं बढ़ सका। ऐसा तब है, जब सूबे के पर्यटन विभाग ने वाटरवेज विभाग द्वारा बनाए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।

26 अगस्त 2011 को बोधगया मंदिर सलाहकार परिषद की बैठक में इसके सौंदर्यीकरण का पहली बार प्रस्ताव आया था। 24 जनवरी 2015 को हुई परिषद की बैठक में वाटरवेज द्वारा डिजाइन बना लिए जाने की जानकारी दी गई व उसे सरकार के पास भेजने की बात कही गई थी। यह भी बताया गया कि इसके लिए पर्यटन मंत्रालय ने 2014 में सूबे के पर्यटन विभाग को 05 करोड़ की राशि उपलब्ध करा दी है। निरंजना नदी के किनारे ही 2600 साल पहले राजकुमार सिद्धार्थ बुद्धत्व की प्राप्ति कर भगवान बुद्ध बने थे।

वाटरवेज विभाग ने बनाया था सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव,पर नहीं हुआ क्रियान्यवन

सौंदर्यीकरण से बढ़ता आकर्षण
योजना के तहत डहेरिया बिगहा से सूरजपुरा तक नदी तट के सुदृढ़ीकरण के अलावा घाटों का निर्माण होगा। इसके अलावा रोशनी की व्यवस्था कुछ इस तरह की जाएगी, जिससे मनमोहक लगे। बैठने के लिए बेंच के अलावा कुटी की भी व्यवस्था होगी। यह तट योजना के पूरा होने के बाद पिकनिक स्पॉट के रूप में भी होगा। नदी में पानी रखने के लिए चार करोड़ से चेक डैम का भी प्रस्ताव है। यह सूरजपुरा के निकट बोधगया नगर पंचायत की सीमा पर होगा।

इंटरनेशनल सिटी का नहीं मिला स्वरूप
शहरी विकास व आवास विभाग सपोर्ट प्रोग्राम फॉर अरबन रिफार्म इन बिहार योजना के तहत बोधगया में आधारभूत संरचना तैयार कर नगरीय सुविधा बढ़ाने को दिसंबर 2011 में 20 सालों के लिए एक योजना बनाई थी। 2030 में बोधगया नगर पंचायत क्षेत्र की संभावित आबादी व फ्लोटिंग आबादी को ध्यान में रखते हुए बोधगया सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाया था। लोगों को उम्मीद थी कि सूबे की सरकार इसपर तत्परता से अमल करेगी, पर ऐसा नहीं हुआ। इन परियोजनाओं के लिए केंद्र, राज्य व नगर पंचायत के आंतरिक स्रोत से 500.67 करोड़ की राशि खर्च का प्रस्ताव था। इन योजनाओं के पूरा होने से बोधगया को इंटरनेशनल सिटी का स्वरूप मिलता।
पर्यटन के लिए हेरिटेज संरक्षण के प्रस्ताव पर भी नहीं हुआ अमल

इस योजना के तहत डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यो-राडार पद्धति से धरोहर संसाधन से परिपूर्ण संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी इकट्ठा करना था। इसके अलावा 1.20 करोड़ ये विशेष क्षेत्र का गठन, 12 करोड़ से वर्ल्ड हेरिटेज साइट महाबोधि मंदिर की लैंडस्केपिंग, पुरातत्व संग्रहालय को छह करोड़ से विस्तारित कर सांस्कृतिक सेंटर बनाया जाना है। 10 करोड़ से क्राफ्ट सेंटर व सांस्कृतिक सेंटर, 20 करोड़ से कालचक्र मैदान व उसके चारों ओर का हिस्सा सौंदर्यीकृत होगा। महाबोधि मंदिर के बाहर धरोहरों को जोड़ने के लिए दो करोड़ से प्रदक्षिणा पथ बनाने का भी प्रस्ताव है। चार करोड़ से कोर व बफर जोन विकसित होगा।

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