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गया में नीच कहकर पंगत से उठाया:तिलक के भोज में छुआछूत, विरोध करने पर पीटा, पंचायत में नहीं बनी बात, पुलिस ने थाने से लौटाया

गया7 दिन पहले
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पंचायत में बैठे लोग। - Dainik Bhaskar
पंचायत में बैठे लोग।

गया में छुआछूत का मामला सामने आया है। यहां नीच जाति कहकर लोगों को पंगत से उठा दिया गया। पंचायत में फैसला नहीं हुआ तो पीड़ित थाने गया, लेकिन वहां भी किसी ने बात नहीं सुनी।

घटना बोधगया के मगध यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव की है। रविवार की दोपहर इस मसले को लेकर गांव में पंचायत भी हुई्, लेकिन दो में से एक पक्ष के मौके पर नहीं आने की वजह से कोई बात नहीं बनी। इसके बाद पीड़ित पक्ष अपना आवेदन लेकर मगध यूनिवर्सिटी थाने पहुंचा तो उसे वहां से यह कहते हुए लौटा दिया गया कि दोपहर बाद आना। दैनिक भास्कर ने जब थानाध्यक्ष रेखा कुमारी से फोन पर बातचीत की तो बताया कि संबंधित मामले की उन्हें जानकारी नहीं है।

क्या है पूरा मामला
पड़रिया गांव के एक व्यक्ति के बेटे का तिलक समारोह चल रहा था। शनिवार की रात 10 बजे गांव के लोगों को पंगत में बिठाकर खाना खिलाया जाया जा रहा था। पंगत में सभी समाज के लोग बैठे थे। प्रमेंद्र कुमार का आरोप है कि भोज में खाना परोसा ही जा रहा था कि किसी युवक ने पंगत में बैठे हमारे भाइयों व मुझे यह कहते हुए उठा दिया कि छोटी जाति के लोग ऊंची जाति के साथ पंगत में नहीं बैठते। यही नहीं, उन लड़कों को यहां तक कह दिया गया कि इससे तो धरती भी अपवित्र हो जाती है। यह बात सुनते ही पंगत में बैठे हम तीनों लड़कों ने विरोध किया तो मामला गरम हो गया और वे मारपीट पर उतारू हो गए। प्रमेंद्र ने बताया कि वह वहां से किसी तरह से जान बचाकर घर लौट आया। प्रमेंद्र का आरोप है कि मामला रात तक ही नहीं रहा, सुबह भी उन युवकों ने घेरकर हमारी पिटाई कर की।

थाने ने भी नहीं सुनी गुहार
इधर, इस बात की जानकारी जब गांव वालों को लगी तो गांव दो पक्षों में बंट गया। दोपहर को पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पड़रिया मुखिया राजेंद्र पहुंचे। करीब एक घंटे तक चली पंचायत में कोई बात नहीं बनी। कारण जिस पर पक्ष पर आरोप लगाया जा रहा था, उस पक्ष के सभी लोग पंचायती में शामिल नहीं हो सके। इधर, प्रमेंद्र के पिता मद्धेश्वर पासवान का कहना है कि वह आवेदन लेकर थाने गया था, लेकिन वहां से यह कह कर लौटा दिया गया कि दोपहर बाद आना। दोपहर बाद जब थानेदार को फोन कर रहे तो वह फोन नहीं उठा रही हैं।

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