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राष्ट्रीय वेबिनार:सकारात्मक सोच किसी भी रोग को दे सकती है मात,मानव तंत्रिका तंत्र को सशक्त बनाने को एक अनुमानी प्रयोग विषय पर वेबिनार

गया12 दिन पहले
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डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह विज्ञान क्लब, अटल टिंकरिंग लैब जिला स्कूल गया, बिहार और डॉ. कलाम विज्ञान क्लब, एटीएल शासकीय बहुदेशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। मानव तंत्रिका तंत्र को सशक्त बनाने के लिए एक अनुमानी प्रयोग विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

इस वेबिनार में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु के 159 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ डॉ. धनंजय पाण्डेय ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की चर्चा के साथ वेबिनार की शुरुआत की।बिहार से शामिल जिला स्कूल गया के डॉ देवेंद्र सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सनातन समय से ही शारीरिक स्वास्थ की मूल अवधारणा रही है।

डॉ. सिंह ने विस्तार से मस्तिक की संरचना, न्यूरॉन्स की क्रियाशीलता को बताया और कहा कि आप पॉजिटिव सोचेंगे तो न्यूरॉन्स की आक्रामकता बढ़ जाती है जो किसी भी रोग से लड़ने में मददगार होते हैं। बताया कि मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे जटिल अंग है। यह चेतना का केंद्र है और सभी स्वैच्छिक व अनैच्छिक गति और शारीरिक कार्यों को भी नियंत्रित करता है।

स्वस्थ जीवन के लिए मानसिक सुदृढ़ता आवश्यक

छत्तीसगढ़ के डॉ. राघवेंद्र गौराहा ने कहा कि कोविड को मैंने काफी करीब से देखा है। किसी को कोविड हो जाने की सूचना से ही वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है और जिंदगी को हारने लगता है। ऐसी स्थिति में मानसिक सुदृढ़ता ही उसका बचाव कर सकती है। डॉ गौराहा ने कहा पूरे कोरोना काल में डॉ. कलाम विज्ञान क्लब एटीएल शासकीय बहुदेशीय उच्चतर मा.वि. बिलासपुर ने सामाजिक जागरूकता के लिए 62 वेबिनार किए

हैं। कहा कि जिला स्कूल गया बिहार के संयुक्त उपक्रम के तहत यह तीसरा वेबिनार है और यह हमारी वास्तव में उपलब्धि ही है। कहा कि जिला स्कूल गया बिहार के जुड़ने से हमारी ताकत दुगुनी हो गई है। एक्सपर्ट पैनल में शामिल अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग के रौनक जोगेश्वर ने भी अपने विचार रखे।

मस्तिष्क को जितना स्वस्थ इनपुट मिलेगा उतना ही होगा सक्रिय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. सोमू सिंह ने कहा कि हमारे हाथ में आउटपुट तो है ही नही। आउटपुट के पीछे जितना भी जाएंगे, हमें कुछ भी नहीं मिलेगा और अस्वस्थ्यता की ओर बढ़ते जाएंगे। कहा कि हमारे हाथ में केवल इनपुट रहता है, जितना स्वस्थ इनपुट हम अपने इन पांचों स्पर्श इंद्रियों से अपने मस्तिष्क में देंगे हमारा मस्तिष्क उतना ही स्वस्थ रहेगा। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वाई श्रीनिवास ने विस्तार से मस्तिष्क, कचरा, सबकंसियस माइंड के बारे में बताया। कहा कि जन्म के समय बालक का मस्तिष्क पूरी तरह कचरे से साफ रहता है। इसलिए उसकी क्रिएटिविटी अच्छी रहती है। धन्यवाद ज्ञापन जिला स्कूल के डॉ. सिंह ने किया।

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