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रमजान:रहमत का अशरा ‘चांद रात’ से शुरू, एक को पहला जुमा, घर पर ही करें इबादत

गया9 महीने पहले
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  • मुस्लिम धर्मगुरुओं ने की अपील, कहा- लॉकडाउन के नियम का पालन कर घर पर ही पढ़ें जुमे की नमाज, रमजान माह में पहले जुमे की होती है खास अहमियत

माह-ए-रमजान...। इस्लाम में इस माह को तीन हिस्सों में बांटा गया हैं। एक से 10 दिन रहमत, 11 से 20 दिन मगफिरत और 21 से 30 दिन निजात का आशरा है। “चांद रात’ से ही रहमत का आशरा शुरू हो गया है। शुरुआत के इन दस दिनों में अल्लाह की रहमतें बंदों पर खूब बरसती है। रहमत के आशरा में एक मात्र जुम्मा 01 मई को पड़ रहा है और बाकि के जुम्मे मगफिरत और निजात के अशरा में पड़ेंगे। मुस्लिम समुदाय में माह-ए-रमजान के पहला जुम्मा का खास महत्व है।

ऐसे तो हर जुम्मे को “छोटी ईंद’ कहते है, पर रहमत व इबादत के इस माह में यह अलग अहमियत रखता है। बता दें कि कोरोना वायरस ने देश में ऐसा कहर ढ़ाया है कि मंदिर के साथ-साथ मस्जिदों का द्वार “लॉक’ हैं। लॉकडाउन से मस्जिदों में इस बार सामूहिक नमाज नहीं होगी। मुस्लिम धर्मगुरुओं की माने तो घर पर ही रहमत के दिनों में आए इस जुम्मा की नमाज अदा करें, साथ ही दुआओं की कसरत करें, ताकि खुशियों का पर्व ईंद को धूमधाम से मनाया जा सके। 

मुसलमानों को रोजा रखना फर्ज 

इस्लामिक कैलेंडर के दूसरे साल (सन् दो हिजरी) शाबान के महीने में अल्लाह का हूक्म आया रमजान में हर मुसलमानों को रोजा रखना फर्ज है। कुरान-ए-शरीफ की सुरत नं. दो आयत नं. 183 से 187 में भी इसका जिक्र है। खानकांह के सज्जादानशीह सह इस्लामिक स्कॉलर सैयद शाह सबाहउद्दीन चिश्ती मोनमी ने बताया कि सन् दो हिजरी से पूर्व भी रमजान में रोजे रखे जाते थे, लेकिन उस समय रोजा रखना फर्ज नहीं था। हजरत पैंगबर मोहम्मद साहब ने भी नौ साल रमजान के रोजे फर्ज होने के बाद रखा। 
रोजा रखने से नेकी करने की बढ़ती है क्षमता 
कुरान-ए-शरीफ में कहा गया है कि रोजा रखने से बुराई कम और नेकी करने की क्षमता बढ़ती है। रोजे के लिए गिनती के दिन है। एक महीना तक इसे रखना फर्ज है। अगर इस बीच कोई बीमार है तो वह रोजा छोड़ सकता है, लेकिन उतने रोजे रमजान के बाद किसी भी दिन रखने होंगे। रोजा की शुरूआत फजर की नमाज से होती है। मगरीब के नमाज (सूर्यास्त) के बाद रोजा पूरा होता है। 
माह-ए-रमजान के पांच दिन बीते, पर नहीं दिख रही तैयारी 
लॉकडाउन 2.0 के कारण मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में माह-ए-रमजान की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। रमजान माह के पांच दिन बीत गए। गुरुवार को रोजेदार अपना छठां रोजा रखेंगे। रमजान का बाजार बंद होने से कपड़े खासकर टोपी की खरीदारी लोग नहीं कर पा रहे हैं।  टोपी मंडी सुना पड़ा है। सारी दुकानें बंद है। खानकांह के नाजिम अता फैसल ने बताया कि अल्लाह से दुआओं की कसरत करें, ताकि यह बीमारी नष्ट हो सके।

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