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वेबिनार:जिनोम सिक्वेंस और वायरस के वेरिएंट पर हो शोध: कुलपति

बोधगया8 दिन पहले
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  • एमयू में कोरोना महामारी : अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व विषय पर वेबिनार, वीसी बोले-भारत को वैज्ञानिक तकनीक की जरूरत

भारत को अमेरिका सहित अन्य देशों से सहयोग प्राप्त कर मानवता की रक्षा करनी चाहिए। भौगोलिक सीमाओं को पार कर कोरोना वायरस ने अंतर्राष्ट्रीय संघात किया है, इसलिए बिना अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के इससे निजात पाना मुश्किल है। मगध विवि के जनसंचार समूह द्वारा कोरोना महामारी: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार में कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि आज भारत को वैज्ञानिक तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है और इस डेटा को सभी के बीच वितरित करना चाहिए, जिससे जिनोम सिक्वेंस और वायरस के वेरिएंट और रोधी वैक्सीन पर कार्य हो सके। बिना सहयोग के इस महामारी का रोकथाम संभव नहीं है। जिस तरह से यह महामारी बेलगाम होती जा रही है, उसमें अमेरिका, रूस सहित अन्य देशों से सहयोग लेना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में कोई देश स्थाई शत्रु या स्थाई मित्र नहीं होता, वायरस डिप्लोमेसी को डिफाइन और रिफाइन की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महामारी ने हमारी कमजोरियों को उजागर किया है। प्राइमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, चिकित्सीय शोध और और अनुसंधान को मजबूत करने की आवश्यकता है।

संबंधों की प्रगाढ़ता से मिल रही मदद| विशिष्ट अतिथि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो इंद्र देव मिश्र ने कहा कि भारत सहित संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। हमें तत्काल सभी दृष्टिकोण से सहायता की जरूरत है। पीएम मोदी के कार्यकाल में जो अंतरराष्ट्रीय संबंध की प्रगाढ़ता आयी है, उसी का नतीजा है कि विश्व के सभी देश इस महामारी से निपटने में आगे आए हैं। ऐसा सहयोग पूर्व में कभी नहीं मिला।

आपदा में सहयोग को स्वीकारें
बीएचयू वाराणसी और भारतीय प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली और लखनऊ विवि में काम कर चुके सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्र एवं प्रबंधन शास्त्र के विशेषज्ञ प्रो पीके चौबे ने कहा कि दोनों विश्व युद्धों के बाद अमीर देशों का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना था। पूर्व के आपदा और इस कोरोना जनित आपदा में बहुत अंतर है। इसका क्राउड यूनिवर्सल है। उन्होंने इस आपदा में मानवीय पक्ष के आधार पर अन्य भाव को त्याग कर किसी देश से सहयोग प्राप्त करने की बात कही, जिससे हम इस महामारी से निपट सकें।

मानव निर्मित है वायरस
मुख्य अतिथि पटना विवि के पूर्व-कुलपति प्रो रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि भारत में यह सुनामी जैसी आपदा है। जब विपदा ही अंतर्राष्ट्रीय हो, तो अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बिना इसे निपटा नहीं जा सकता। यह सभी मौसम व भौगोलिक क्षेत्रों में समान रूप से फैली है। इसकी न कोई समय है और न सीमा है। यह वायरस मानव निर्मित है, इसीलिए ज्यादा घातक है। भारत अभी सभी देशों से सहयोग प्राप्त कर लें।

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