महिला दिवस विशेष:लोगों के चेहरे पर संतुष्टि देखकर लगा कि अपने मिशन में सफल हो गई

गया9 महीने पहले
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  • साइको थेरेपिस्ट व क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ श्वेता कुमारी ने कहा-मनोविज्ञान में महिलाएं बेहतर काम कर सकती हैं

भारत में प्राचीन समय से ही मानसिक स्वास्थ्य व मन को साधने की बात कही जाती रही है। भगवान बुद्ध ने भी मन अर्थात चित्त की परिशुद्धि की बात करते हैं। वे कहते हैं, चित्त के आधार पर ही हमारे कर्म कुशल व अकुशल होगें। लेकिन आज वर्तमान दौर में चित्त व मन को शरीर से अलग समझा जाने लगा है।

शरीर स्वस्थ तभी होगा, जब हमारा चित्त स्वस्थ होगा। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, अलग नहीं किया जा सकता। लोगों को यही समझाने को पहला उठाने की देर थी, अब उनके चेहरे पर संतुष्टि का भाव देख लगा सफलता मिल रही है। गया शहर की साइको थेरेपिस्ट व क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डा श्वेता कुमारी ने उक्त बातें कही।

वे माइंडफुल न्येरोसाइक हेल्थ सेंटर का संचालन करती हैं व बोधगया के बोधि ट्री स्पेशल स्कूल में काम करती हैं। वे रायपुर के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीच्यूट आॅफ बिहेवियरल एंड मेडिकल साइंसेज से क्लिनिकल साइकोलोजी में एमफिल की हैं। 2018 से गया में मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही हैं। बोधि ट्री स्पेशल स्कूल में 65-70 विशेष बच्चों की देखरेख करती हैं।

समय पर देती हैं परामर्श
इंटैलेक्चुअल हेल्थ डिस्ऑर्डर में बिहार सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, डेवलपमेंटल डिस्ऑर्डर में समय पर परामर्श से लाभ होता है। अगर बाद के लिए उसे छोड़ेगें, तब परेशानी बढ़ेगी। प्रायः अभिभावक उसे हल्के में लेते हैं और सोचते हैं, उम्र की परिपक्वता के साथ ठीक होगा, ऐसा नहीं होता है। प्रायः लोग मानसिक परेशानी या डिस्ऑर्डर को शारीरिक मानकर छिपाते हैं।

करती है साइको थेरेपी
लोग चिंता, तनाव, घबराहट, बेचैनी, सरदर्द, नींद की समस्या, विचारों का बार-बार आना आदि के लिए कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके अधिक समय तक रहने पर दूसरी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। परेशानी होने पर लोग अब मनोचिकित्सक के पास पहुंचने लगे हैं। इससे समस्या का निपटारा जल्द होगा है। इसके लिए साइको थेरेपी जरूरी होता है।

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