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  • Special Importance Of Worship On The Occasion Of Shardiya Navratri, These Days There Is A Crowd Of Seekers, Devotees, Saints.

52 शक्तिपीठों में एक है माता जयमंगला का मंदिर:शारदीय नवरात्र के अवसर पूजा-पाठ का विशेष महत्व, इन दिनों साधकों, श्रद्धालुओं, संतों की भीड़ लगी रहती है

गया9 दिन पहले
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बेगूसराय जिला मुख्यालय से उत्तर व मंझौल अनुमंडल मुख्यालय से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जयमंगला माता मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्र के अवसर पूजा पाठ का विशेष महत्व है। इन दिनों साधकों, श्रद्धालुओं, संतों की भीड़ लगी रहती है। प्रातः से ही या देवी सर्वभूतेषू जयमंगला रूपेण संस्थिता, दुर्गा सप्तशती,बीज मंत्र के पाठ एवं मंत्रो के जप से वातावरण गुंजायमान होते रहता है। भारत के 52 शक्तिपीठों में माता जयमंगला की गिनती होती है।

स्वर साधकों एवं संगीत प्रेमियों का अद्भुत स्थल है जयमंगला मंदिर

कहा जाता है कि जब भगवान शंकर सती का शव लेकर घूम रहे थे तो चक्र से उसके टुकड़े कर दिया और सती का अंग जिस-जिस स्थान पर गिरे, वह शक्तिपीठ कहलाए। जयमंगलागढ़ में भगवती के वाम स्कंध का पात हुआ जिससे धकार की तेज ध्वनि उत्पन्न हुई। यहां गंधर्वों ने ज्ञान प्राप्त किया। इसलिए यह स्थल स्वर साधकों एवं संगीत प्रेमियों का अद्भुत स्थल माना जाता है।

जनश्रुति के अनुसार, बशिष्ठ ऋषि ने भी यहीं स्वर सिद्धि प्राप्त की। महात्मा बुद्ध ने भी जयमंगला की उपासना की थी और ब्रह्मविद्या को प्राप्त किया। कहा जाता है कि कामाख्या और विंध्याचल के ठीक बीच में अवस्थित माता का यह सिद्ध स्थल नवदुर्गा के नवम स्वरूप में विद्यमान है तथा सिद्धिकामियों को सिद्धि प्रदान करते हैं।

श्रीमददेवीभागवत मेें है भगवती जयमंगला का वर्णन
कहा जाता है कि मंगल स्वरूपा माता जयमंगला किसी के द्वारा स्थापित नहीं अपितु स्वेच्छा से दिव्य स्तुतियों से द्रवित होकर दानवों के निग्रह एवं भक्तजनों के कल्याण के लिए स्वतः प्रकट हुई। यों तो समाज में कई किंवदंतियां प्रचलित है परंतु भगवती जयमंगला का सुंदर वर्णन श्रीमददेवीभागवत में प्राप्त होता है। आदिकाल से मंगलवार और शनिवार को दिन पूजन के लिए वैरागन माना जाता है।

ये देवी मंगल चंडी जयमंगला नाम से विख्यात है। नवरात्र के मौके पर दूर दूर से लोग मनौती चढ़ाने के लिए यहां पहुंचते हैं। भगवती को प्रसाद चढ़ाने के बाद वे उनके वाहन बंदर को प्रसाद खिलाने से नहीं चूकते हैं। ऐतिहासिक जयमंगला मंदिर चारों ओर से वन क्षेत्र एवं जिले की पहचान कावर झील के बीच में स्थित है। घने वन एवं झील के बीच में स्थित होने से पूरा मंदिर रमणीय लगता है।

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