• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Gaya
  • Students Are Constantly Raising Questions, Who Is Responsible For The Disorder, Who Does Not Have The Right To Decide In Charge, Then What Is The Use Of That Post?

मगध विवि में अनिर्णय से होती जा रही अराजक स्थिति:छात्र लगातार उठा रहे सवाल, अव्यवस्था की जवाबदेही किसकी, प्रभार में निर्णय लेने का अधिकार नहीं, तब वह पद किस काम का

गया19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

सरकार का मोटो है न्याय के साथ विकास। लेकिन इसे क्रियान्वित नहीं किया जा रहा। यह नारा केवल कागजों तक सिमटा दिखता है। उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में न्याय का या कानून का राज नहीं दिखता। कानून कहता है, गिरफ्तारी के 24 घंटे में अधिकारी व कर्मी को सस्पेंड करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने 20 दिसंबर को मगध विवि के चार अधिकारी व कर्मी को पूछताछ के लिए पटना कार्यालय बुलाया, जहां पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया व बाद में मंगलवार को सुनवाई के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया। उनके साथ विवि के कुलसचिव डॉ पुष्पेंद्र कुमार वर्मा के साथ तीन अन्य प्राॅक्टर जयनंदन प्रसाद, केंद्रीय पुस्तकालय प्रभारी प्रो बिनोद सिंह और सहायक व कुलपति के पूर्व पीए सुबोध कुमार भी न्यायिक हिरासत में भेजे गए।

न्यायिक हिरासत के 24 या 48 घंटा कौन कहे, 18 दिन से अधिक हो चुका है, लेकिन सस्पेंशन आजतक नहीं हुआ। यह अनिर्णय की स्थिति क्यों। कुलपति का प्रभार संभाले मगध विवि के प्रतिकुलपति ने सस्पेंशन के लिए राजभवन से दिशा-निर्देश मांगा और राजभवन ने आजतक किसी तरह की गाइडलाइन नहीं दी। नतीजा विवि की अराजक स्थिति। छात्रों का कहना है कि प्रति कुलपति को कुलपति का प्रभार सौंपा गया, लेकिन नीतिगत व वित्तीय फैसला नहीं ले सकते। जब फैसला या निर्णय नहीं ले सकते, इसका अधिकार नहीं है, तब वैसा पदधारी क्यों और किस काम का।

प्रभारी कुलसचिव पर अनिर्णय
मगध विवि बिना कुलसचिव का चल रहा है। अभी तक किसी को प्रभार नहीं सौंपा गया है। प्रभारी कुलपति ने राजभवन को को सूची भेजा, लेकिन 17 दिनों से अब तक निर्णय नहीं लिया गया है। कुलसचिव किसी भी विवि का कस्टोडियन होते हैं। उनके बिना विवि का संचालन मुश्किल है। यही वजह है दो माह की सैलरी आने के बावजूद कर्मियों को नहीं मिली है। विवि परिसर में विधि व्यवस्था के लिए प्राॅक्टर का होना जरूरी है, लेकिन यह पद भी खाली है। पीएचडी प्रभारी का पद भी खाली है। इससे विवि का काम प्रभावित हो रहा है।

पीएचडी का नहीं हो रहा रिजल्ट
पीएचडी प्रभारी डा बिनोद सिंह के एसवीयू द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यहां भी अनिर्णय की स्थिति से शोधछात्रों को दो-चार होना पड़ रहा है। पीएचडी मौखिकी के बाद रिजल्ट पेंडिंग है। इसमें छात्रों की गलती क्या है। बार-बार उन्हें या तो विवि आना पड़ रहा है या अपने शोध निदेशक से पूछताछ कर रहे हैं। कई विभागों का अक्टूबर में हुई पीएचडी मौखिकी का भी रिजल्ट पेंडिंग है।

खबरें और भी हैं...