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  • Team Of Youth Formed To Save Bataspur From Epidemic, Only Two Positives Found In Village In 15 Months

मिसाल:बतसपुर को महामारी से बचाने को बनाई युवाओं की टीम, 15 माह में गांव में मिले सिर्फ दो पॉजिटिव

बोधगयाएक महीने पहले
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  • गांव में सिर्फ ट्रेसिंग, टेस्टिंग व ट्रीटमेंट पर दिया ध्यान, अबतक गांव के 35 फीसदी से अधिक लोगों ने ली वैक्सीन

कोरोना संक्रमण की चेन को गांव के युवाओं की सामूहिक भागीदारी ने तोड़ा। 22 मार्च 2020 को जनता कफ्र्यू के बाद 24 मार्च से लाॅक डाउन पूरे देश में लगा। लोगों के मन में कोरोना वायरस का भय घर कर गया। लोग खुद संयमित रहने की कोशिश की व सरकार के सभी गाइडलाइन को खुद पालन कर रहे थे। गांव के युवाओं ने अपनी सक्रियता दिखाई व घर-घर घूम कर लोगों में जागरूकता लाई। अनलाॅकिंग प्रक्रिया में आने के बाद धीरे-धीरे ग्रामीण थोड़ा लापरवाह दिखने लगे।

इसी का नतीजा था कि पहली बार 10 मई 2021 को दो व्यक्ति कोरोना पाॅजिटिव निकले। यह वाक्या है प्रखंड के बतसपुर गांव का। 311 घरों का यह गांव आत्मनियंत्रण का उदाहरण प्रस्तुत किया और गांव को संक्रमण से मुक्त रखने में कामयाब रहा। गांव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोरंजन समदर्शी ने कहा, युवाओं की एक टीम बनाई, जो घर-घर निरीक्षण करती थी। जगह-जगह बाहरियों के प्रवेश पर रोक के संबंध में सूचना लगाई। बड़े-बुजुर्ग ग्रामीण भी संकट के दौर से निकले में अपना साथ दिया। महादलित टोला में भी जागरुकता अभियान चला, जिसका लाभ दिखा।

35 युवाओं का बनाया दल

श्री समदर्शी ने कहा, गांव के 35 युवाओं का दल गठित किया। यह दल घरों की निगरानी करते थे। जरूरत पड़ने पर मुफ्त में मास्क भी वितरित करते थे। घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी था। मास्क देखने के लिए भी युवा तैनात थे। इन युवाओं में शशि रंजन, शशि कुमार, दीपू राज, जय प्रकाश गिरि, रंजीत शर्मा, प्रभात शर्मा, रंधीर कुमार, शंकर लाल, प्रमोद कुमार, सौरभ ठाकुर, संतोष सिन्हा, अभिषेक कुमार सहित अन्य शामिल थे, जिन्होंने पूरी तत्परता के साथ गांव को संक्रमण से बचाने में योगदान दिया।

थ्री-टी पर दिया ध्यान

श्री समदर्शी ने कहा, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बाहरियों के प्रवेश पर लगाया। बारातियों की संख्या निर्धारित कर दी गई। बाहर से आने वालों की जांच करते थे। बिना मास्क गांव में प्रवेश के दौरान मास्क देते थे। थ्री टी अर्थात ट्रेसिंग, टेस्टिंग व ट्रीटमेंट पर ध्यान दिया। दो में लक्षण मिलने पर उनकी जांच करवाई गई। दोनों पाॅजिटिव को आइसोलेट कर, चेन को वहीं खत्म किया। इससे पूरा गांव सुरक्षित रहा। कोरोना से यह ग्रामीणों की जीत थी।

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