पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

वोकल फाॅर लोकल:टेक्सटाइल हब में विकसित कर दिया जा सकता है बाहर से आ रहे हर हाथ को काम

बोधगया4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जिले का बुनियादगंज व मानपुर है सूबे का प्रमुख टेक्सटाइल प्रोडक्ट सेंटर
  • गया में काॅटन टेक्सटाइल उत्पादन का से मिल रहा प्रमाण

आत्म निर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार व प्रशासन को ठोस कदम उठाने पड़ेगें। स्थानीय प्रोडक्ट को ब्रांड बनाने की दिशा में रोडमैप बनाने की जरूरत है और उसे क्रियान्वित करने की भी। अगर प्रवासी श्रमिकों की वापसी का लाभ उठाना है और उन्हें रोजगार से जोड़ कर पलायन से रोकना है। गया के मानपुर के वस्त्र उद्योग को बढ़ाने व सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है। जिले के मानपुर और बुनियादगंज को टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

वर्तमान उत्पादन क्षमता को बढ़ा कर बाहर से आए प्रवासी श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध किया जा सकता है। यहां 11 हजार पावरलूम है, जिसमें लाॅकडाउन के पहले 45 हजार श्रमिक दो शिफ्ट में काम करते थे। इससे दैनिक लगभग 50 लाख का कपड़ा तैयार होता था। अभी एक शिफ्ट में लगभग 30 लाख का कपड़ा उत्पादन हो रहा है।

यहां बेडशीट, गमछा, ओढ़ने का चादर, तोसक का कपड़ा का उत्पादन होता है। जिय कुमार पान ने बताया, पहले गया में बिहार स्टेट हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट काॅरपोरेशन लिमिटेड का डिपो था, जहां से जनता साड़ी व जनता धोती बुनाई को धागा मिलता था। बुनकरों को मजदूरी मिलता था। अब यह भी खत्म हो गया।
सिल्क में लागत अधिक
सिल्क वस्त्र उत्पादन में अब लागत बढ़ गई है। मार्केट नहीं होने के कारण भागलपुर जाकर बिक्री करना पड़ता है। गया में कोकून चाइबासा, जगदलपुर और चक्रधरपुर से आता है। अब गया में मात्र 10 इकाई रह गई है, जो सिल्क सर्टिंग का उत्पादन करते हैं। यही वजह है, उत्पादक अब दैनिक श्रमिक बन पावरलूम की ओर शिफ्ट कर गए।
आता था इटली से कृत्रिम सिल्क धागा
गया में सिल्क व कृत्रिम सिल्क के कपड़ों का उत्पादन होता है। 1956 के गया गजेटियर के अनुसार बुनियादगंज में लगभग 400 परिवार सिल्क के शूटिंग व शर्टिंग कपड़े तैयार करते थे। लेकिन गुणवत्ता अच्छी नहीं होती थी। कच्चा माल चाइबासा व पलामू से आता था। कृत्रिम रेशम वस्त्र के लिए इटली व जापान से धागा आता था। इससे साड़ी, धोती, चादर तैयार होता था।
इतिहास के आइने से
1811-12 के बुकानन गया सर्वे रिपोर्ट में गया में सूती हैंडलूम उत्पादन की जानकारी दी गई है। उसके रिपोर्ट के अनुसार, 100 धुनिया, 40 रंगरेज, 33885 कतिन, तसर बुनकर घर से काम करनेवाले 200 व लूम पर 250, सूती वस्त्र बुनकर घर से 2120 व लूम पर 2500 थे। 1854 के थाॅरंटन गजेटियर भाग एक में गया के मानपुर व बुनियादगंज सहित अन्य हिस्से में सिल्क, सूती व कंबल उत्पादन का उल्लेख है। ग्रियर्सन के रिपोर्ट ऑफ द कंडिशन आॅफ द पूअरर क्लासेज ऑफ गया में बुनकरों की स्थिति का उल्लेख है व उन्हें शिल्पकारों की श्रेणी में रखा गया है।
ये कहते हैं

  • सरकार दो शिफ्ट में उत्पादन की अनुमति देकर कुछ प्रवासी प्रशिक्षित मजदूरों को रोजगार उपलब्ध करा सकती है। -प्रेम प्रकाश पटवा, अध्यक्ष, वस्त्र उद्योग बुनकर सेवा समिति
  • पहले सौ से अधिक यूनिट था, अब घट कर 10 रह गया है। गया में सिल्क का मार्केट होना चाहिए था। इससे बुनकरों का पलायन नहीं होगा। -विजय कुमार पान, सिल्क उत्पादक
0

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज घर से संबंधित कार्यों को संपन्न करने में व्यस्तता बनी रहेगी। किसी विशेष व्यक्ति का सानिध्य प्राप्त हुआ। जिससे आपकी विचारधारा में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। भाइयों के साथ चला आ रहा संपत्ति य...

और पढ़ें