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जिले में 100गर्भवती में से 64 होती हैं एनीमिया ग्रस्त:जिले को एनीमिया मुक्त बनाने की चुनौती बरकरार, गर्भवती गंदे स्थानों पर नंगे पैर नहीं जाएं

बोधगया2 महीने पहले
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पोषण माह में एनीमिया दूर करने के लिए किया जा रहा जागरूक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 100 गर्भवती में से 64 गर्भवती एनीमिया से ग्रसित हैं, जबकि 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की 65.5 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया ग्रसित हैं। ऐसे में जिला को एनीमिया मुक्त बनाने की चुनौती बरकरार है। स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा एनीमिया दूर करने के लिए पोषण के प्रति व्यवहार परिवर्तन पर बल दिया गया है। पोषण अभियान जैसे कार्यक्रम की मदद से पोषण पर पारिवारिक तथा सामाजिक जागरूकता लायी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के डॉ एमई हक ने बताया एनीमिया को बढ़ाने में कई मिथ्य की भी भूमिका है। उन्होंने बताया एनीमिया होने का एक बड़ा कारण कृमि है। लोगों में यह मिथ्य है कि नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है, लेकिन यह सिर्फ मिथ्य है। नंगे पैर चलने के दौरान हुक वर्म और राउंड वर्म जैसे कृमि शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यह कृमि रक्त कोशिकाओं को अपना भोजन बनाते हैं। गांवों में महिलाएं गौशाला सहित चापाकल के, शौचालय व अन्य गंदी जगहों पर नंगे पांव जाती हैं। इससे कृमि पैर के संपर्क में आते और शरीर में प्रवेश कर जाते और यह एनीमिया का कारण बनता है। खानपान संबंधी मिथ्याओं पर चर्चा कर बताया कि अमूमन धारणा यह है कि काजू, किशमिश व दूसरी प्रकार के मेवों में ही सबसे अधिक आयरन होते हैं, जबकि सबसे अधिक आयरन गुड़, चुकंदर, पालक साग और खजूर में होता है।

अंकुरित अनाज में है आयरन अपने आसपास वाली ऐसे खाद्य पदार्थ का चयन करें, जिसमें आयरन की अधिक मात्रा होती है। ऐसे खाद्य पदार्थ के बारे में जानकारी लें और इसका इस्तेमाल करें।  अंकुरित अनाज में भरपूर आयरन होता है। अंकुरित चना तथा मूंग, राजमा, मटर, बींस, मसूर दाल का सेवन काफी लाभदायक है। आयरन अच्छी तरह से शरीर में अवषोशित हो सके इसके लिए नींबू का सेवन जरूर करें। ध्यान रखें कि चाय या कॉफी से शरीर के आयरन में कमी होती है। जो हानिकारक है।

एनीमिया से बढ़ता है प्रसव संबंधी जोखिम आईसीडीएस डीपीओ भारती ने बताया परिवार के सदस्यों दवारा गर्भवती महिलाओं के बेहतर खानपान का प्रबंधन जरूरी है। पोषण माह के मद्देनजर अच्छे पोषण की अहमियत की जानकारी दी जा रही है। एनीमिया के कारण किशोरियों तथा महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत अधिक प्रभावी होता है। किशोरियों में एनीमिया होना उनके मां बनने की पूरी प्रक्रिया को जोखिम में डाल देता है। एनीमिया के कारण प्रसव के समय अधिक खून बहना तथा इससे होने वाली मौत मातृ मृत्यु दर का एक बड़ा कारण है।

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