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“ईद-ए-कुर्बानी’:अकीदतमंदाें ने घर में ही नफील पढ़ की अल्लाह के रसूल की बड़ाई, मस्जिदों का द्वार “बंद’

गया9 दिन पहले
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“ईद-ए-कुर्बानी’ बकरीद। त्याग व बलिदान का पर्व ईद-उल-अजहा बुधवार को जिले में बेहद सादगी के साथ मना। कोविड 19 के कारण ईदगाह के साथ-साथ मस्जिदों का द्वार अकीदतमंदों के लिए लॉक रहा। अकीदतमंदों ने घर में ही नफील पढ़ अल्लाह के रसूल की बड़ाई की। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी। बता दें कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस बार न तो गांधी मैदान में सामूहिक नमाज हुई और न ही ईदगाह का द्वार अकीदतमंदों के लिए खुला। शहर की अधिकांश मस्जिदें बंद रही। मस्जिदों में मौलाना ने ही नमाज अदा की, हालांकि कुछ मदरसों व मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सोशल डिस्टेंस बना कर बकरीद की नमाज अदा की, साथ ही एक-दूसरे को बधाई भी दी। लगातार दूसरे साल ईदगाह का द्वार लॉक होने से ईद की तरह बकरीद में भी हजरत से गले मिलने की ईच्छा पूरी नहीं हुई।

कुर्बानी के बगैर अधूरा है यह पर्व : खानकांह
खानकांह के नाजिम सैयद अता फैसल ने बताया कि यह पर्व कुर्बानी के बिना अधूरा है। कुर्बानी का यह पर्व हमें कई बातों को सिखाता है। पैंगबर इब्राहिम से खुदा ने अपनी राह में सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने का हुक्म किया तो वे अपने कलेजे के टुकड़े बेटे हजरत इस्माइल को खुदा की राह में कुर्बानी करने को तैयार हो गए। उनकी इस कुर्बानी ने एक अजीम मिशाल कायम की, तभी से बकरीद का पर्व मनाया जा रहा है

मस्जिदों के पास सुरक्षा बलों की रही तैनाती
शहर के जामा मस्जिद, छत्ता मस्जिद, ईदगाह (कर्बला), खानकाह मस्जिद, शाही मस्जिद, पीरमंसूर मस्जिद, छोटी मस्जिद, मुन्नी मस्जिद, न्यू करीमगंज, कोईरी बारी सहित अन्य मस्जिदों के पास सुरक्षा बलों की तैनाती रही। जिला प्रशासन द्वारा भी 36 संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करते हुए 36 स्टैटिक दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। सभी दंडाधिकारी 23 जुलाई तक विधि व्यवस्था का संधारण सुनिश्चित करेंगे।

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