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दुर्गापूजा:पीतल के रंगों में चमकती नजर आएंगी माता, सात बाधों वाले रथ पर सवार माता की प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र

गया18 दिन पहले
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए भले ही जिले में आकर्षक पंडाल नहीं बनाए जा रहे हैं। लेकिन आकर्षक प्रतिमा इस बार भी लोगों के लिए देखने लायक होगा। बेहतर और सबसे अलग प्रतिमा बनाने के लिए मशहूर किरण सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति माता की भव्य और आकर्षक प्रतिमा बना रही है। इस बार आठ शेरों वाले रथ पर माता को विराजमान कर समिति ने सबसे अलग करने की कोशिश की है।

मालूम हो कि इस बार पूरी प्रतिमा पीतल के कलर का बनाया जा रहा है। माता की पूरी प्रतिमा समेत सात बाघ के रथ पर सवार माता पीतल के रंग में काफी आकर्षक बनाया जा रहा है। इसके अलावे मुख्य गेट पर हाथी लोगों के स्वागत के लिए बनाया जा रहा है। जबकि मंदिर में प्रवेश करते ही दोनों तरफ की दीवार पर भगवान गणेश विराजमान होगें। इस संबंध में अध्यक्ष अनिल झा ने बताया कि वर्ष 1991 से ही इस मंदिर में माता दुर्गा की प्रतिमा बनाई जा रही है।

उन्होंनें बताया कि हर साल पूजा समिति द्वारा कुछ ना कुछ अलग करने का प्रयास किया जाता रहा है। कभी प्रकृति को देखते हुए पूर्ण प्राकृतिक प्रतिमा तो काफी विभिन्न प्रकार की धातु से प्रयोग से प्रतिमा बनाई जाती है। उन्होंनें बताया कि सभी प्रतिमा बंगाल में बनाई जाने वाली प्रतिमा के थीम पर ही बनाई जाती है। अध्यक्ष ने बताया कि पूजा समिति काफी कम खर्च में सबसे बेहतर प्रतिमा बनाने के लिए हमेशा प्रयास करती है। उन्होंनें बताया इस बार भी प्रतिमा निर्माण से लेकर लगभग सारी व्यवस्था में करीब दो लाख रुपए खर्च होने की उम्मीद है।

साथी कहा कि कोरोना के कारण पंडाल के बाहर तो कुछ नहीं किया जा रहा है। लेकिन कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए मंदिर के अंदर माता की भव्य प्रतिमा बनाई जा रही है। जो एक से दो दिनों में बनकर तैयार हो जाएगी। प्रतिमा का निर्माण पिछले सात साल से लगातार काम करने वो कारीगर विक्की, कुंदन, छोटू द्वारा प्रतिमा बनाई जा रही है। वहीं इस पूरे आयोजन में सचिव ज्योति प्रभात सिंहा, उपाध्यक्ष पप्पु महतो, उसचिव पुनीत महतो, कोषाध्यक्ष लालु कुमार का योगदान सराहनीय है।

अब तक बनाई गई प्रतिमा का स्वरूप
वर्ष 2011 में 90 किलो पीतल से मां की प्रतिमा बनाई गई थी। इसके बाद 2012 में पूर्ण प्राकृतिक सामानों से माता की प्रतिमा बनी थी। जिसमें रंग भी प्राकृतिक था। इसके बाद 2013 में 215 किलो पीतल से मां की प्रतिमा बनी थी। जिसमें अस्त्र-शस्त्र भी पीतल के ही थे। ऐसे 2014 में फिर से नेचुरल तरीके से जबकि 2015-16 में पंडाल के अंदर देवी देवाताओं को विराजमान किया गया था। 2017 में सिर्फ मिट्टी से निर्मित प्रतिमा बनाई गई थी। जिसमें अस्त्र-शस्त्र बनाई गई थी। वहीं 2018 में सभी देवी देवताओं के सपरिवार प्रतिमा बनाई गई थी।

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