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  • The Name Kept Changing, But This Hospital Added Golden Chapters To The Pages Of History, The Foundation Was Laid For The Treatment Of Corpse

आज का जेपीएन-कल का पिलग्रीम:नाम बदलते रहे पर इस अस्पताल ने इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अध्याय जोड़े, पिंडदानियों के इलाज के लिए रखी गई थी नींव

गयाएक महीने पहले
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(रत्नेश कुमार) वर्ष 1887, जब बिहार और पं. बगाल जब साथ थे, तो चिकित्सा के क्षेत्र में गया में एक बड़ी लकीर खींची जा रही थी। इस खींची गई लकीर का नाम पिलग्रीम अस्पताल पड़ा था। अपने स्थापना काल के चंद वर्ष बाद ही पिलग्रीम अस्पताल ने एक बड़ा इतिहास रच दिया था।

यह इतिहास था, बंगाल जोन (उस समय बिहार और बंगाल एक थे) में यह पहला ऐसा अस्पताल या स्थान था, जाहां लैप्रोटोमिक ऑपरेशन शुरू हुआ था। आज पिलग्रीम अस्पताल का नाम जयप्रकाश नारायण अस्पताल में तब्दील हुआ है। 133 साल सफलता के साथ पूरा करने के बाद निश्चित तौर पर यह ऐतिहासिक हो चुका है, जिसने इतिहास के पन्नों में कई स्वर्णिम अध्याय भी जोड़े।
1887 में स्थापना: देश-विदेश के पिंडदानियों के लिए चार बेड के हॉस्पिटल से सफर हुआ था शुरू
मोक्षधाम गया जी में देश के विभिन्न प्रांतों के अलावे विदेश से श्रद्धालु पिंडदान करने को आते थे। कई दिनों का धार्मिक अनुष्ठान होने के बीच पिंडदानी अक्सर बीमार भी पड़ जाते थे और मुश्किलें आती थी। पिंडदानियों की दिक्कतों को देखते हुए वर्ष 1887 में चार बेड के अस्पताल की स्थापना की गई, जिसका नाम पिलग्रीम रखा गया। यह केवल पिंडदानियों के लिए था। कुछ सालों बाद इसका टेकओवर गया डिस्ट्रिक्ट बोड ने हाथ में लिया। वर्ष 1901 के आसपास उसी के तहत टेकओवर हुआ। इसके बाद 80 बेड के अस्पताल के रूप में पिलग्रीम अस्पताल तब्दील हुआ। तीर्थयात्रियों के अलावे सिविलयन का इलाज शुरू हुआ।
पहले सिविल सर्जन का नाम शिलापटट में नहीं
सीएम ब्रजेश कुमार सिंह ने भास्कर के साथ इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में बातचीत करते हुए कुछ अहम खुलासे भी किए हैं। इसमें बड़ा खुलासा तो यह है, कि सरकार ने अब तक डाॅ. मेजर सीई सुन्दर के गया के पहले सीएस होने का कोई नहीं किया है। शिलापटट में भी इनके नाम नहीं हैं, लेकिन 1901 के मेडिकल मैगजीन और अन्य पुष्ट स्त्रोतों से डाॅ. मेजर सीई सुन्दर के गया के पहले सीएस होने की बात सामने आती है।

जेपीएन की ऐतिहासिक यात्रा काफी लंबी : सीएस
पिलग्रीम यानि तीर्थयात्री। पिलग्रीम अस्पतला ने अपने 133 साल पूरे किए हैं। इसे लेकर शताब्दी समारोह भी मनाया जा रहा है। यह   काफी प्रख्यात और ऐतिहासिक रहा है।  -ब्रजेश कुमार सिंह, सिविल सर्जन गया।

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