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  • The Young Candidate Of Congress Stands In The Way Of BJP's Victory In Wazirganj Seat, The Existence Of Mufassil Seat Before Wazirganj In 2010

चुनावी दंगल:वजीरगंज सीट पर भाजपा की जीत के रास्ते खड़ा है कांग्रेस का युवा प्रत्याशी, 2010 में वजीरगंज के पहले था गया मुफस्सिल सीट का अस्तित्व

गया8 महीने पहले
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एनडीए प्रत्याशी भाजपा के बिरेंद्र सिंह की जीत आसान नहीं दिख रही है। उनकी जीत का रास्ता रोकने इस बार युवा प्रत्याशी खड़े हैं। कांग्रेस के शशि शेखर सिंह जहां 42 साल के हैं, वहीं भाजपा के बिरेंद्र सिंह 65 साल के हैं। कांग्रेस के शशि शेखर सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता व पर्व विधायक अवधेश कुमार सिंह के बेटे हैं। श्री सिंह ने वजीरगंज सीट के गठन से पहले गया मुफ्फसिल विधानसभा सीट से चार बार कांग्रेस के टिकट व एक बार निर्दलीय जीत प्राप्त कर चुके हैं। वजीरगंज सीट से उन्होंने कांग्रेस के टिकट से 2015 में जीत प्राप्त की।

अब देखना है कि शशि शेखर अपने पिता की विरासत बचाने में कितना सफल रहते हैं। कांग्रेस के साथ जहां उनके पिता के परंपरागत वोट और महागठबंधन का माय समीकरण के साथ रहने की संभावना है, वहीं भाजपा के साथ भाजपा का परंपरागत वोटरों के अलावा एनडीए से जुटे वोटरों के साथ की संभावना है। दोनों प्रत्याशी व दलों के बीच चुनाव संघर्ष बेहतर रहने की संभावना है। शशि के अलावा अन्य युवा भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। निर्दलीय शीतल प्रसाद यादव, जाप के राजीव कुमार कन्हैया, भारतीय सबलोग पार्टी के चित्तरंजन कुमार व रालोसपा के श्रीधर प्रसाद भी चुनावी मैदान में हैं।

नोटा पर देना होगा ध्यान
पिछले चुनाव 2015 में नोटा पर 3.47 फीसदी वोट का बटन दबा। इसपर ध्यान देना होगा। हार-जीत के लिए यह वोट प्रतिशत अहम भूमिका निभा सकता है। जानकारों का कहना है पटवा, ब्राह्मण सहित अन्य भाजपा कैडर वोट का बिखराव कम होगा। राजपूत प्रत्याशियों के कारण उसके वोट व मांझी वोट में सेंधमारी हो सकती है, जो निर्णायक हो सकता है। भूमिहार वोट में भी बिखराव की संभावना है। चित्तरंजन जैसे कुछ युवा, चुनाव घोषणा से पहले से जनसंपर्क में हैं, लेकिन खास प्रभाव नहीं डालेगें। राजीव कुमार कन्हैया पूर्व भाजपा नेता हैं, लेकिन पार्टी के वोट को तोड़ने में सफल नहीं होगे। शीतल यादव कुछ प्रभाव डाल सकते हैं व रेस में रहने की संभावना है।

कई बार बदला क्षेत्र परिसीमन|1977 में वजीरगंज, मानपुर, गया शहर के कुछ वार्ड व परैया के कुछ हिस्सा को मिलाकर मुफ्फसिल विधानसभा सीट का गठन हुआ। इस नाम से कुल आठ चुनाव हुए, जिसमें पांच बार अवधेश कुमार सिंह और दो बार डा विनोद कुमार यादवेंदु ने जीत हासिल की थी।

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