देवी दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्र:इस बार तिथि क्षय नहीं होने से नौ दिनों का होगा नवरात्र

गया2 महीने पहले
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जगत जननी मां भगवती की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस बार नवरात्र में एक भी तिथि क्षय नहीं है, इस वजह से भक्त मां दुर्गा की आराधना पूरे नौ दिनों तक करेंगे। तीन अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत है। चार को नवमीं का हवन और पांच को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। खास बात यह है कि नवरात्र बाबा भोले की आराधना का पावन दिन सोमवार से शुरू हो रहा है, जो काफी शुभ दिन है। हाथी पर बैठ माता रानी हमारे घरों में आएगी और हाथी पर बैठ प्रस्थान करेगी। आचार्य नवीन चंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि माता का आना और जाना दोनों काफी शुभ व फलदायक है। अच्छी वर्षा का संकेत है। इधर नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में भी तैयारी शुरू कर दी गई है। माता रानी के दर्शन के लिए शक्तिपीठ मां मंगलागौरी, मां शीतला, मां बागेश्वरी, मां बांग्ला, मां दु:खहरणी के दरबार में भक्तों की भीड़ जुटेगी।

दो अक्टूबर को पंडालों में विराजेगी मां दुर्गा पहाड़ों वाली मां दुर्गा दो अक्टूबर को पंडालों में विराजमान होगी। इसी दिन माता का नयन पूजन के बाद भक्ताें के दर्शन के लिए पट को खोल दिया जाएगा। शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर में दो अक्टूबर को ही निशा पूजा होगी। मां को 56 प्रकार का भोग लगाया जाएगा। ठीक इसके अगले दिन श्रद्धालु महाअष्टमी का व्रत करेंगे। चार अक्टूबर को महानवमी का हवन होगा। इस दिन कुंवारी कन्याओं का पूजन भी किया जाएगा।

नवरात्र की प्रमुख तिथियां 26 सितंबर कलश स्थापना 02 अक्टूबर महानिशा पूजा 03 अक्टूबर महाअष्टमी व्रत 04 अक्टूबर नवमीं का हवन 05 अक्टूबर विजयादशमी

एक साल में चार बार आते है नवरात्र आचार्य की माने तो नौ शक्तियों के मिलन को नवरात्र कहा जाता है। एक वर्ष में चार बार नवरात्र आते है। बसंत ऋतु में आने वाले को चैत्र या वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। शरद ऋतु व आश्विन मास में आने वाले नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है। बाकि दो यानि गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ में आते है। इस दौरान मां दुर्गा की 10 महाविधाओं की साधना होती है।

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