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सियासत:पूर्व सीएम समेत तीन विधायकों की बदल रही क्षेत्र से निष्ठा

गया14 दिन पहले
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  • बदली राजनैनिक परिदृश्य में तलवार की धार पर गया जिले के कई विधायकों के िटकट

माहौल पूरी तरह से चुनावी होता जा रहा है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गांव की गलियाें तक सबसे आगे है चुनावी चर्चा। तरह-तरह के कयास लग रहे हैं। सर्वाधिक सीट शेयरिंग की। फिर सवाल कौन-कौन होगा हमारे सामने प्रत्याशी? कौन अपनी सीट छोड़ दूसरी जगह शिफ्ट हो रहा? किस वर्तमान विधायक के टिकट कटेंगे? इन सभी सवालों के जवाब अभी अनुत्तरित हैं। परिस्थितिजन्य कयास और तरह-तरह की चर्चा हो रही। बदले राजनैतिक परिदृश्य ही इन चर्चाओं का मुख्य आधार है। सभी संभावित उम्मीदवार अपने राजनैतिक आकाओं के यहां दौड़ तेज कर चुके हैं। वैसे कतिपय नेता टिकट के प्रति आश्वस्त हो क्षेत्र भ्रमण भी करने लगे हैं।

पिछले चुनाव में जदयू महागठबंधन का हिस्सा था

बदले राजनैतिक परिदृश्य में कुछ विधायकों की क्षेत्र से निष्ठा भी बदल रही है। पिछले चुनाव में जदयू महागठबंधन का हिस्सा था। इस बार एनडीए के साथ है। दलों के प्रति जातीय गोलबंदी ने कतिपय विधायकों का मनोबल नई परिस्थिति में तोड़ दिया है। इसलिए वे क्षेत्र बदलना चाहते हैं। पहला नाम टिकारी से जदयू विधायक अभय कुशवाहा का आ रहा है। वे अब बेलागंज से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस क्षेत्र में उन्होंने अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है। पूर्व सीएम जीतनराम मांझी इमामगंज से विधायक हैं।

उम्र का हवाला देकर वे पहले तो बोल रहे कि अब चुनाव लड़ना नहीं चाहते। पूर्व सीएम के करीबी लोगों का मानना है कि वे असल में इमामगंज के बजाय मखदुमपुर से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं। चर्चा है कि सीएम नीतीश कुमार ने उनसे इमामगंज से ही एक बार फिर चुनाव लड़ने का आग्रह किया है। इसी प्रकार वजीरगंज से कांग्रेस विधायक अवधेश कुमार सिंह गुरुआ से टिकट मांग रहे हैं। कहा तो यह भी कहा जा कि यदि गुरुआ सीट राजद के खाता में जाती है तो श्री सिंह को इसी दल के टिकट पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। हालांकि विधायक अवधेश सिंह ने साफ किया है कि गुरुआ से कांग्रेस पार्टी का सिम्बॉल मिलने पर ही लड़ेंगे। वे वजीरगंज से अपने पुत्र को लड़ाना चाहते है।

कई विधायकों के टिकट पर अनिश्चितता

अतरी की राजद विधायक कुंती देवी पर कई मुकदमा चल रहा है। हत्या के एक मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। फैसला कभी भी आ सकता है। संभव है निचली अदालत में इन्हें सजा मिल जाय। ऐसे में राजद यहां कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी। कुंती देवी के पति राजेन्द्र यादव भी विधायक रहते सजायाफ्ता हुए और जेल में हैं। अतरी से राजद के कई दावेदार हैं परंतु पार्टी अंतत: इसी परिवार पर ही भरोसा करेगी। चर्चा यही है कि विधायक पुत्र रणजीत यादव को पार्टी उम्मीदवार बना सकती है।

शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक विनोद कुमार यादव के लिए भी इस बार परिस्थितियां भिन्न है। ऐसे में इनका टिकट भी तलवार की धार पर है। गुरुआ से भाजपा विधायक राजीव नंदन दांगी का भी पार्टी में बड़े स्तर पर विरोध हो रहा है। भाजपा का एक खेमा यहां से किसी दमदार उम्मीदवार को उतरना चाहता है। बेलागंज से यदि जदयू ने अभय कुशवाहा को नहीं आजमाया तो फिर बेटिकट होने की संभावना बन सकती है।

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