अब नहीं आएगी बाढ़....नदी बदलेगी अपनी धार:गोपालगंज में जियो ट्यूब स्टर्ड की सफल टेस्टिंग; गंडक में उतारा तो नदी ने बदला रास्ता

गोपालगंज3 महीने पहले

बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। जियो ट्यूब की मदद से अब नदियों का रुख बदलकर बांध को मजबूत किया जाएगा। बिहार में पहली बार गोपालगंज जिले में पतहरा छरकी पर गंडक नदी के किनारे इसकी सफल टेस्टिंग की गई है। दावा है कि इससे बाढ़ की तबाही को रोका जा सकता है। जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कटाव रोकने के लिए 54 लाख की लागत से पांच स्टर्ड के लिए 12 ट्यूब लगाए हैं।

ट्यूब पक्के तटबंध की तरह काम करेंगे। इस ट्यूब के निर्माण में नदी के बीच से सेलरी (गहराई से निकाला गया पानी सहित बालू) निकालकर ट्यूब भरा जाएगा, जिससे नदी की गहराई भी बढ़ेगी और ट्यूब के लिए आवश्यकतानुसार सेलरी भी निकाली जाएगी। साथ ही ट्रेडिशनल माध्यम से कराए जा रहे काम से सस्ता भी होगा।

गंडक नदी के किनारे लगाया गया जियो स्टर्ड ट्यूब।
गंडक नदी के किनारे लगाया गया जियो स्टर्ड ट्यूब।

अभी 5 स्टर्ड का कराया गया है निर्माण

इस बारे में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रकाश दास ने बताया कि नदी का रुख बदलने के लिए पहले ट्रेडिशनल तरीके से काम किया जाता था। लेकिन इस बार नए टेक्नोलॉजी द्वारा नदी का रुख बदलने के लिए बिहार में पहली बार टेस्टिंग के लिए जियो ट्यूब स्टर्ड का निर्माण किया गया है। अभी फिलहाल 5 स्टर्ड का निर्माण कराया गया है, जो काफी कारगर साबित हुआ। अगले साल अन्य जगहों पर लगाई जाएगी।

एक स्टर्ड बनाने में करीब दस लाख का खर्च

जियो ट्यूब पॉलीमर प्रोपेलीन मैटेरियल से बना है। यह एडवांस तकनीक से बना एक तरह का हार्ड सिंथेटिक कपड़ा होता है। उन्होंने बताया कि एक ट्यूब में करीब 53 टन सेलरी(बालू) भरा जाता है। इसके निर्माण में लागत की बात करें तो एक ट्यूब में लगभग एक लाख और एक स्टर्ड बनाने में करीब दस लाख खर्च होते हैं। वर्तमान में टेस्टिंग के लिए 54 लाख की लागत से पांच स्टर्ड के लिए 12 ट्यूब लगाए गए हैं। जो काफी कारगर साबित हुआ। इस बार लगातार हुई बारिश और वाल्मीकि नगर बराज से छोड़े गए पानी पार हुई लेकिन बांध पर कोई असर नहीं हुआ।

बता दें कि जिले में बाढ़ की समस्या नासूर बनी हुई है। हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ से भारी तबाही मचती है। सैकड़ों लोग बाढ़ की भेंट भी चढ़ चुके हैं। हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। हर साल कटाव रोकने के लिए पहले सामान्य प्लास्टिक की बोरी में बालू भरा जाता था जो बाढ़ में बह जाते हैं। इस बार विभाग गंडक से होने वाले कटाव को रोकने के लिए नया तरीका अपना रहा है।