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अब एक पैर से कूदकर नहीं जाना होगा स्कूल:जमुई की बेटी को मिली ट्राईसाइकिल, भास्कर की खबर के बाद प्रशासन पहुंचा घर

जमुईएक महीने पहले

एक पैर पर 1 KM कूदकर स्कूल जाने वाली जमुई की सीमा को अब पंख मिल गया है। दैनिक भास्कर में खबर आने के बाद प्रशासन स्वयं उनकी मदद के लिए उनके घर पहुंचा। जिला प्रशासन की ओर से डीएम अवनीश कुमार ने सीमा को स्कूल जाने के लिए ट्राईसाइकिल भेंट की।

जिला प्रशासन की पूरी टीम बुधवार को सीमा के घर पर मौजूद थी। सभी ने सीमा को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान उसकी पढ़ाई की लगन को सभी ने सराहा। इस मौके पर जमुई के जिला अधिकारी अवनीश कुमार ने कहा कि सीमा का पढ़ने के प्रति हौसला काबिल-ए-तारीफ है। वह खुद अपनी प्रेरणा से स्कूल जा रही है, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है।

सीमा के स्कूल में जल्द होगा स्मार्ट क्लास

यही नहीं जल्द कृत्रिम पैर लगाने का भी आश्वासन दिया गया। सीमा जिस स्कूल में पढ़ती है, उस स्कूल में 1 महीने के अंदर स्मार्ट क्लास बनाया जाएगा। जिलाधिकारी अवनीश कुमार ने कहा कि सीमा के माता-पिता जो काफी गरीब हैं, इनके परिवार को जल्द राशन कार्ड, मकान, सरकारी योजना के तहत मिलने वाली सारी सुविधाएं मिलेगी।

इसके साथ ही जिलाधिकारी ने कहा कि अगर इस तरह के दुर्घटना के शिकार कोई अन्य बच्चा भी है तो उनको टोला सेवकों द्वारा चिन्हित किया जाए और ऐसे लोगों को उचित सुविधा मुहैया कराई जाए। ताकि किसी भी वजह से ऐसे बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। वहीं ट्राईसाइकिल मिलने के बाद सीमा बहुत खुश थी।

वहीं, अभिनेता सोनू सूद ने ट्वीट कर कहा है कि, "अब यह अपने एक नहीं दोनों पैरों पर कूद कर स्कूल जाएगी। टिकट भेज रहा हूं, चलिए दोनों पैरों पर चलने का समय आ गया।"

बोली- पढ़ती हूं...ताकि गरीबों को पढ़ा सकूं

सीमा खैरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित इलाके फतेपुर गांव में रहती है। उनसे पिता का नाम खिरन मांझी है। सीमा की उम्र 10 साल है। 2 साल पहले एक हादसे में उसे एक पैर गंवाना पड़ा था। इस हादसे ने उसके पैर छीने, लेकिन हौसला नहीं। आज अपने गांव में लड़कियों के शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रति एक मिसाल कायम कर रही है। वह अपने एक पैर से चलकर खुद स्कूल जाती थी और आगे चलकर शिक्षक बनकर लोगों को शिक्षित करना चाहती है।

बिहार से बाहर मजदूरी करते हैं पिता

सीमा के पिता बिहार से बाहर रहकर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। सीमा की मां बेबी देवी बताती हैं कि 6 बच्चों में सीमा दूसरे नंबर पर है। उसका एक पैर सड़क दुर्घटना में कटाना पड़ा था। सीमा की मां बताती है कि दुर्घटना के बाद गांव के दूसरे बच्चों को स्कूल जाते देख, उसकी भी इच्छा स्कूल जाने की होने लगी। सीमा ने खुद से स्कूल जाकर पढ़ने की लालसा जताई। स्कूल के टीचर ने सीमा की एडमिशन स्कूल में कर दिया।

सीमा बताती है कि वह पढ़ लिखकर टीचर बनाना चाहती है। टीचर बनकर के घर के और आसपास के लोगों को पढ़ाना चाहती है। सीमा बताती है कि एक पैर कट जाने के बाद भी कोई गम नहीं है। मैं एक पैर से ही अपने सारे काम कर लेती हूं।

हादसे में मासूम का काटना पड़ा था पैर, बोली- पढ़ती हूं...ताकि गरीबों को पढ़ा सकूं