जांच:150 लकड़ी टालों व आरा मशीनों में से सिर्फ 9 के पास ही लाइसेंस

जहानाबाद10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • पर्यावरण सुरक्षा को लेकर वन विभाग की गंभीरता की खुली पोल, पेड़ों की अवैध कटाई पर भी ध्यान नहीं

विभिन्न स्तरों पर पर्यावरण को ले रोज बड़ी-बड़ी बातें व संदेश प्रसारित होते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर गंभीरता का घोर अभाव दिख रहा है। मात्र एक प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित इस जिले में जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तरीय व कस्बाई इलाके में लगभग डेढ़ सौ आरा मशीन व लकड़ी टालों का खुलेआम संचालन हो रहा है लेकिन उनमेें से सिर्फ नौ लोगों के पास ही लाइसेंस है। निर्बाध तरीके से हो रहे लकड़ी के अवैध व्यवसाय से पहले से ही पर्यावरण की समस्या से जूझ रहे जिले को और भी भारी नुकसान हो रहा है।

इस पूरे मामले की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग तहर-तरह की बहानेबाजियों व संसाधनों की कमी का हवाला दे चुपचाप बैठा है। हालांकि इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय अंचल अधिकारियों एवं थाना पुलिस को भी संयुक्त रूप से जिम्मेवारी दी गई है लेकिन बेरोकटोक चल रहे इस धंधे से जिम्मेवार अधिकारी भी जानबूझ कर अनजान बने हैं। वन विभाग से लेकर प्रशासन पर भी पर्यावरण को ले गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

लकड़ी के अवैध धंधे में एक नेटवर्क की भूमिका
खबर के अनुसार अवैध आरा मशीन के संचालन में एक नेटवर्क काम करता है पहली कड़ी में मजदूर किस्म के लोग होते हैं ,जो पेड़ों की कटाई कर करते हैं। वही दूसरे कड़ी में शामिल लोग लकड़ी की धुलाई कर आरा मशीन तक पहुंचाते हैं। इस दौरान स्थानीय थाना पुलिस को लकड़ी की गाड़ी पार करने के लिए गुजरना शुल्क भी उन्हें देना पड़ता है। बाद में आरा मशीन पर लकड़ी पहुंचने के बाद उसकी चिराई होती है।

कर्मियों की कमी भी बनी है कार्रवाई में बाधा
जिले में 16 वनरक्षी व दो वनपाल के पद सृजित हैं। जिसमें दो वनपाल एवं 9 वनरक्षी फिलहाल मौजूद हैं जबकि सात वनरक्षी के पद खाली पड़े हुए हैं। जिससे अवैध धंधेबाजों पर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में भी परेशानी होती है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन का भी अपेक्षित सहयोग वन विभाग को नहीं मिल पाता जिससे लकड़ी के धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।

नौ आरा मशीनों को ही जिले में मिला है लाइसेंस
वन विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार जिले में नौ आरा मशीन ही लाइसेंस धारी हैं। जिनको विभागीय मानदंड के अनुसार कारोबार करने के अनुमति दी गई है। किंतु दूसरी तरफ नजर दौड़ाए तो जिला मुख्यालय का शहर से लेकर विभिन्न प्रखंड मुख्यालय के कस्बाई बाजारों में कुल मिलाकर लगभग डेढ़ सो की संख्या में आरा मशीन व लकड़ी टाल संचालित हो रहे हैं। इन आरा मशीन पर हरे पेड़ों की कटाई कर लाई गई लकड़ी को खुलेआम चिराई हो रही है। अन्य जगहों की बात क्या करने कुछ वर्ष पूर्व काको थाने से भी कई हरे पेड़ काटकर गायब कर दिए गए। तत्कालीन थानेदार की भूमिका को लेकर भी इस मामले में एक वरीय जांच अधिकारी ने सीधे तौर पर उंगली उठाई थी लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

^जिले में 9 आरा मशीन को लाइसेंस हैं। जबकि अन्य अवैध रूप से संचालित है। विभागीय स्तर पर अवैध आरा मशीनों के विरुद्ध अभियान चलाकर मशीन को सीज किया जाता है। बीते वर्ष भी कई मशीन को जब्त किया गया था। पुनः अवैध आरा मशीन के विरुद्ध अभियान चलाकर जब किया जाएगा। ब्रजेन्द्र कुमार, फोरेस्टर, वन विभाग जहानाबाद।

खबरें और भी हैं...