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लापरवाही:11 साल पहले बना कोचिंग एक्ट विभागीय सुस्ती से लागू नहीं, बिना पंजीयन चल रहीं दर्जनों संस्थानें

भभुआ2 महीने पहले
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पढ़ने जाते छात्र - Dainik Bhaskar
पढ़ने जाते छात्र
  • बुद्धिजीवी कह रहे- कोचिंग संस्थान में ना तो विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं ना ही विभागीय अफसरों को इसकी चिंता

पिछले 11 साल पहले बना कोचिंग एक्ट जिले में विभागीय सुस्ती से अब तक लागू नही हुआ है।ऐसे में बिना पंजीयन के ही दर्जनों कोचिंग संस्थानें चल रही है।दरअसल जिले में सैकड़ों की संख्या में संचालित कोचिंग संस्थानों में ना तो विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं हैं ना ही विभागीय अफसरों को ही इसकी चिंता है। बता दें कि 11 साल पहले बने कोचिंग एक्ट को लागू करवाने में जिला प्रशासन अभी तक कोई कारगर पहल नहीं कर पाया है। इसका फायदा उठाकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कोचिंग संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है।

हर गली मोहल्ले में बिना रजिस्ट्रेशन के ही कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं।बता दें कि बिहार कोचिंग संस्थान नियंत्रण व विनियमन अधिनियम 2010 के तहत क्षेत्र में चल रहे सभी कोचिंग सेंटर को शिक्षा विभाग से निबंधन कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद भी नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में कोचिंग सेंटर बिना निबंधन के चल रहे हैं। साल 2010 में बने अधिनियम के 12 साल बीत जाने के बाद भी बिना रजिस्ट्रेशन के ही आए दिन कोचिंग संस्थान खुल रहे हैं। शहर सहित ग्रामीण इलाकों में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित कोचिंग सेंटरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।बीते वर्षों में कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विभाग की ओर से पहल की गई थी।इसके बाद शिक्षा विभाग ही सुस्त पड़ गया और फिर कोचिंग सेंटर के निबंधन का मामला ठंडा पड़ गया।

निबंधन के लिए यह सुविधाएं अनिवार्य
बिहार कोचिंग संस्थान नियंत्रण एवं विनियम अधिनियम 2010 के प्रावधानों के मुताबिक कोचिंग संचालन के लिए बुनियादी प्रावधान किए गए हैं।मसलन कोचिंग संस्थान का क्षेत्रफल, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, नामांकन फीस, पाठ्यक्रम पूर्ण करने की अवधि, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, समुचित उपस्कर, बेंच डेक्स, पर्याप्त रोशनी, शुद्ध पेयजल,स्वच्छता, अग्निशमन,आकस्मिक चिकित्सा सुविधा, साइकिल या वाहन पार्किंग की व्यवस्था, कोचिंग संस्थानों में होनी चाहिए। यह सब होने के बाद ही उसे विभाग द्वारा निबंधन प्रमाण पत्र दिया जाता है।

विभाग भी नहीं ले रहा रुचि
शहर सहित ग्रामीण इलाकों में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालक कोचिंग सेंटर पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से कोचिंग संचालकों के हौसले बुलंद है। विभाग की ओर से बीते वर्षों में रजिस्ट्रेशन को लेकर आदेश निर्देश जारी किए गए।इसके बावजूद कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन को लेकर कोई बेहतर पहल नहीं की गई। कोचिंग संस्थानों को निबंधन का निर्देश जारी किए जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन को लेकर ना तो कोचिंग संचालक नहीं विभाग कोई दिलचस्पी ले रहा है।

शिक्षा विभाग में दिए गए आवेदन लंबित
कुछ कोचिंग संस्थानों द्वारा शिक्षा विभाग में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया। इसके बावजूद विभाग के सुस्त रवैए की वजह से कोचिंग सेंटरों के रजिस्ट्रेशन का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में ही है। कोचिंग सेंटरों के निबंधन का मामला विभाग में लंबित होने के कारण इसका सीधा फायदा कोचिंग संचालकों को हो रहा है। किसी भी तरह का लगाम नहीं लगने के कारण संचालक मनमानी फीस और बिना सुविधा के ही अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।जिस पर लगाम लगाने की दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

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