खेती-बाड़ी:बरारी दियारा के परवल की यूपी व नेपाल में भी है डिमांड

जितेंद्र कुमार | बरारीएक महीने पहले
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गंगा घाट पर ट्रक पर परवल लोड करते। - Dainik Bhaskar
गंगा घाट पर ट्रक पर परवल लोड करते।
  • दियरा क्षेत्र के किसानों को 11 सौ से 12 सौ रुपए प्रति क्विंटल व्यापारी दे रहे परवल की कीमत

परवल की खेती करने वाले किसानों को इस बार मई माह में परवल का सही रेट मिलने से किसान के चेहरे खिले हुए हैं। व्यापारी 11 सौ से 12 सौ रुपया प्रति क्विंटल की रेट में होलसेल रेट में ले रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रखण्ड के दियरा क्षेत्र के किसान परबल की खेती व्यापक पैमाने पर करते हैं।जानकारी के अनुसार इस बार करीब एक हजार एकड़ में किसान परवल की खेती किये हुए हैं। परवल की खेती में अनुमानित प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपए की लागत आती है। यहां की मुख्य विशेषता यह है कि दियरा में उपजने वाला परवल काफी स्वादिष्ट होता है।

कइ राज्यों में है डिमांड | यहां का परवल नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड एवं बिहार के कई बड़े मंडियों में काफी डिमांड है। काढ़ागोला गंगा घाट के दियरा से रोजाना 15 से 20 गाड़ी (3 हजार से 4 हजार बोरी) परवल मंडियों में भेजी जाती है। घाट लेसी सह पूर्व पंचायत समिति सदस्य संजय यादव का कहना है कि बरारी के परवल का नेपाल, उत्तरप्रदेश, झारखंड एवं बिहार के मंडियों में एक अलग पहचान है। चूंकि यहां के परवल में खाद की मात्रा काफी कम होती है।

दियारा में परवल का अच्छा हुआ फसल
पूर्व पंचायत समिति संजय यादव, मुखिया प्रतिनिधि मसकुर आलम, वार्ड सदस्य अखिलेश यादव किसान आशीष कुमार, मिट्ठू यादव, मो. नेपाली, मो. मकसूद, अखिलेश यादव आदि किसानों का कहना है कि इस बार दियरा में परवल की काफी अच्छी पैदावार हुई है। किसान कर्ज लेकर खेती की है, हालांकि इस बार किसानों को परवल का सही रेट मिल पा रहा है जिस कारण किसानों में इस बार खुशी है।

असम से मंगाया जाता है परवल का लत
किसानों ने बताया कि असम के डिब्रूगढ़ से परवल का लत (लत्तर) मंगाया जाता है जिसकी लागत प्रति क्विंटल 8000 से 9000 रुपया पड़ता है ।परवल की खेती क्षेत्रों के किसानों के लिये अच्छी आय का साधन है। किसानों ने बताया कि इसकी खेती काफी खर्चीला है क्योंकि लत्तर असम से मंगाया जाता है।एवं मजदूरी में भी काफी खर्च हो जाता है।इन किसानों का कहना है कि खेती करने के लिये कोई भी सरकारी मदद नहीं मिल पाती है।महाजनों से कर्ज लेकर खेती करनी पड़ती है।

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