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कटिहार में दो दिव्यांगों की अनोखी दोस्ती:एक देख नहीं सकता, दूसरा चल नहीं सकता, फिर भी दिव्यांग विवाह समारोह के लिए पूरे शहर में बांट रहे हैं कार्ड

कटिहार2 महीने पहले
दिव्यांग विवाह समारोह को सफल बनाने में जुटे दोनों दिव्यांग दोस्त

कटिहार में दो दिव्यांग दोस्त अपनी तरह ही लाचार, बेबस और बेसहारा लोगों के लिए खुशियां बांट रहे हैं। वहीं कल यानी तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले सामूहिक दिव्यांग विवाह समारोह को सफल बनाने में दोनों दिव्यांग दोस्त जुटे हुए हैं । दोनों दिव्यांग दोस्तों में से एक का नाम लोको हैं जबकि दूसरे का नाम कमाल है। लोको शारीरिक रूप से पूरी तरह लाचार हैं और कमाल पूरी तरह से दृष्टिहीन है रत्तीभर भी नहीं दिखता लेकिन नसीब के मारे इन दोनों लाचारों ने इसके बाबजूद जीना, मुस्कुराना सीख लिया है।

एक- दूसरे की मदद से पूरे शहर में बांट रहे हैं कार्ड
एक- दूसरे की मदद से पूरे शहर में बांट रहे हैं कार्ड

पूरे शहर में लोगों को न्योता दे रहे हैं दोनों

लोको ट्राइसाइकिल पर सवार रहता है और कमाल उसके ट्राइसाइकिल को धक्का देता है। लोको, दृष्टिहीन कमाल के लिये रौशनी का काम करता हैं और फिर दोनों एक- दूसरे की मदद से सामूहिक विवाह समारोह का निमंत्रण पत्र बांटने शहर में निकल पडते हैं। लोको और कमाल की जोड़ी कई लोगों को सामूहिक दिव्यांग विवाह समारोह का दावत दे चुके हैं। दोनों को घूम-घूमकर लोगों को दावत देने में कोई हिचक और कोई परेशानी नहीं बल्कि दोनों खूब खश नजर आ रहे हैं। दोनों सामूहिक विवाह में लोगों से आने का दरख्वास्त भी करते हैं कि हमारे खुशियों में आप भी शरीक हों, विवाहित जोड़े को आशीर्वाद दें।

दिव्यांग जोड़ों का करवा रहे हैं विवाह
दिव्यांग जोड़ों का करवा रहे हैं विवाह

क्रिकेट के बड़े शौकीन हैं दोनों

दिव्यांग लोको बताते हैं कि उसे बहुत ही खुशी हैं कि जिनका कोई नहीं है, उनके हम हैं और हमलोग भी वैसे ही हैं जैसे वे लोग हैं। दिव्यांग कमाल बताते हैं कि आज के दौर में जो शरीर से अच्छे हैं, वह सभी तो शादी कर ले रहे हैं और उसके शादी समारोह में बहुत लोग काम करने वाले भी मिल जाते हैं, लेकिन लाचार, गरीब के शादी में कोई हाथ बटाने वाला नहीं मिलता। हमलोग ऐसे ही बेसहारा लोगों की जीवन मे खुशियां बांटने की कोशिश में जुटे हुए हैं। मजे की बात यह हैं कि दोनों दिव्यांगों की जोड़ी क्रिकेट के बड़े शौकीन हैं । कार्ड बांटने के बीच मौका निकाल दोनों क्रिकेट मैदान भी पहुंच जाते हैं और क्रिकेट का लुफ्त भी उठाते हैं।