भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:एक करोड़ से हुआ कटावरोधी काम जिसे 15 दिनों में ही लील गई कोसी

राकेश कुमार सिंह | बेलदौर9 दिन पहले
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तेलिहार में कटाव स्थल पर लगाए गए बांस बल्ले और गेबियन क्षतिग्रस्त होकर झुका। - Dainik Bhaskar
तेलिहार में कटाव स्थल पर लगाए गए बांस बल्ले और गेबियन क्षतिग्रस्त होकर झुका।
  • बेलदौर में कोसी नदी किनारे बसे गांव पर फिर मंडरा रहा कटाव का खतरा

बेलदौर प्रखंड के विभिन्न स्थानों पर कोसी नदी अपना कहर लगातार बरपा रही है। लेकिन तेलिहार पंचायत में इसका असर ज्यादा है क्योंकि यहां कोसी और बागमती नदी का संगम होता है। यही कारण रहा कि तेलिहार पंचायत के ठाकुरबासा में कोसी नदी से 27 वर्षों में 4 बार भीषण कटाव हुआ और 250 एकड़ से ज्यादा सोना उगलने वाली उपजाऊ जमीन कोसी नदी के गर्भ में समा गई। इसका दूसरा पहलू यह रहा कि 200 से अधिक रैयत भूमिहीन होकर विस्थापित हो गए और बांध पर अपना आशियाना बनाकर रहने लगे। अभी हाल ही में जब कटाव तेज हुआ था तो कटाव रोधी कार्य के लिए लोगों ने यहां आंदोलन शुरू कर दिया था। जिसके बाद कटाव स्थल का पटना से आई टीम ने निरीक्षण किया और कार्य शुरू करने के लिए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2 को निर्देश दिया। जिसपर वहां 1 करोड़ की लगात से कटाव रोधी कार्य शुरू किया गया। जिसके तहत कटाव वाले भाग में 400 मीटर कटाव रोधी कार्य करवाया गया है। जिसमें 10-10 मीटर पर बल्ला पायलिंग के बीच गेबियन लगाया गया और उसके बाद जीओ बैग नदी में डाला गया। लेकिन नदी के तेज करंट में किया गया कटावरोधी कार्य एक बार फिर से 15 दिन में ही क्षतिग्रस्त हो गया और अब फिर से कटाव शुरू होने के कारण ग्रामीण असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

कटावरोधी कार्य आंशिक रूप से हुआ क्षतिग्रस्त
50 मीटर भाग में तेज करंट के कारण आंशिक रूप से कटाव रोधी कार्य के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी वरीय अधिकारी को दे दी गई है। यहां नदी में करंट तेज है। उक्त स्थल पर सोल कटिंग व स्लोप कार्य कराये जाने की जरूरत है। जिसका एस्टीमेट बनाकर विभाग को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जायेगा।
- मणिकांत पटेल, जेई- बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2

ऐसे समझें: कोसी का कहर
बेलदौर प्रखंड में कोसी नदी से हो रहे कटाव से आधी आबादी प्रभावित है। बलैठा पंचायत के डुमरी दुर्गा स्थान के लगभग 100 परिवार के आशियाने पर कटाव का खतरा मंडरा रहा है। वहीं नवटाेलिया पचाठ में 250 परिवार कटाव के दहशत में जी रहे हैं। यहां कटाव निरोधक कार्य चल रहा है। जबकि मुनी टोल पचाठ में 25 परिवार के ऊपर विस्थापन का खतरा उत्पन्न है। इतमादी पंचायत के गांधीनगर (पचबिघी) गांव के प्राथमिक विद्यालय के साथ-साथ 400 परिवार के ऊपर से विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। जहां कटाव में वर्ष 2021 में प्राथमिक विद्यालय गांधीनगर का बाउंड्री वाॅल व पुराना भवन नदी में विलीन हो गया था। 2 दर्जन के करीब घर नदी में समा चुका है। वहीं बारूण गांव समीप जमींदारी बांध को कटाव से बचाने बल्ला पायलिंग का कार्य किया जा रहा है।

तीन सौ परिवार चार बार कटाव से विस्थापित हुए
कामास्थान के 300 परिवार चार बार कटाव से विस्थापित होकर भूमिहीन की जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। जहां 3 दशक के कटाव में ढाई सौ एकड़ से अधिक उपजाऊ जमीन नदी के गर्भ में विलीन हो चुका है। जिसमें अधिकांश कटाव पीड़ित परिवार बांध या लीज की जमीन पर झोपड़ी नुमा घर बनाकर जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। जहां जमींदार रैयत में विलास सिंह, चलित्तर सादा, वकील सिंह, प्रकाश ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह, गोपाल सिंह, संजय सिंह, अमर सिंह, चंद्रकिशोर ठाकुर, रसबिहारी ठाकुर समेत दर्जनों रैयत कोसी कटाव में जमीन गंवाने से भूमिहीन बन चुके हैं। जबकि कटाव रोधी कार्य के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद विभाग अब तक कोसी कटाव पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है। जहां विगत वर्ष तेलिहार के चकला बासा व बीपी मंडल सेतु के उत्तरी भाग में नदी की धारा बांध से 25 मीटर दूर रहने पर कटाव रोधी कार्य करवाया गया था, जो नदी की धारा में विलीन हो गया। वही विगत वर्ष ठाकुर बासा में कोसी कटाव से चानो सिंह, विष्णु देव सिंह समेत 5 लोगों का घर व जमीन कटाव में विलीन हो गया।

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