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  • After The Death Of Her Husband, She Taught The Children By Sewing embroidery And Papad, The Daughter Understood The Compulsion, Practiced Hockey Without Shoes.

मदर्स डे पर खास:पति की मौत के बाद सिलाई-कढ़ाई और पापड़ बेल कर बच्चों को पढ़ाया, बेटी ने मजबूरी समझी, बिना जूते के ही हॉकी की प्रैक्टिस की

द्रवेश कुमार | खगड़िया14 दिन पहले
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नवनीत कौर के साथ उनकी मां तलविंदर कौर। - Dainik Bhaskar
नवनीत कौर के साथ उनकी मां तलविंदर कौर।
  • पिता के मौत के बाद नवनीत के लिए मां ने निभाई पिता की भी जिम्मेदारी

लाख कष्टों और मुसीबतों का सामना कर मां अपने बच्चों को खुश देखना चाहती है। हरेक मां चाहती है कि उसकी पहचान बच्चों से बने। इसके लिए मां परेशानियों को हमसात कर वह सब सुख सुविधा अपने बच्चों को देती है जिससे उन्हें आगे बढ़ने में कोई परेशानी है। ऐसी ही मां तब सफल होती है जब उनके बच्चे सितारे बन जाते हैं। एेसी ही कहानी है मां तलविंदर कौर की। आज दुनिया उन्हें नेशलन हॉकी खिलाड़ी नवनीत कौर की मां के रूप में जानती है। नवनीत कौर मात्र 3 वर्ष की थी जब उनके पिता का निधन हो गया था। जिसके बाद उनके समक्ष कई समस्याएं आ गई थी। लेकिन तलवींद्र ने परिस्थितियों से कोई समझौता नहीं किया। मां के साथ पिता बनकर पारिवारिक जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर उठा लिया। घर गृहस्थी चलाने के लिए कभी कपड़े की सिलाई की तो कभी पापड़ बेलकर पांच बच्चों को पालना और उन्हें वह सब उपलब्ध कराया तो उनकी उड़ान भरने के लिए जरूरी था। तलविंदर कौर ने भास्कर संवाददाता से कहा कि सिलाई कड़ाई से ही अपने 5 बच्चों (4 पुत्री और 1 पुत्र) का पालन पोषण किया। नवनीत थोड़ी बड़ी हुई तो उन्हें हाॅकी खेल बहुत पसंद था। लेकिन उस समाज से लड़कियों को खेलने के लिए बाहर नहीं जाने दिया जाता था।  बावजूद नवनीत दूसरे का पुराना हाॅकी लेकर ही खेलने चली जाती थी, मना करने पर रोने लगती थी। पहले तो उसकी जिद के कारण उन्हें खेलने जाने दिया गया और फिर साथ में और भी लड़कियां जाने लगी। नवनीत को हाॅकी में काफी रूचि थी और पढ़ाई के साथ-साथ हाॅकी खेलती गई। हाॅकी संघ के सचिव विकास कुमार का उसकी सफलता में सराहनीय योगदान रहा है।

कभी भूखे तो कभी बिना जूते खेलने जाती थी नवनीत
तलवींद्र कौर ने बताया कि नवनीत जब खेलना शुरू की थी तो घर की स्थिति ठीक नहीं था। कभी भूखे तो कभी बिना जूते के भी खेलने चली जाती थी। अपने बच्चों को भूखे रखते देख एक मां कैसे रहती होगी यह समझा जा सकता है। मगर नवनीत का खेल में रूचि देखते हुए किसी तहर हर परिस्थिति को झेलकर भी जब जिस चीज की जरूरत हुई, उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश की गई। जिस कष्ट का नतीजा है कि नवनीत अभी नेशनल खेल रही है।

बीमारी से नवनीत के पिता की हुई थी मौत
नवनीत कौर की मां तलवींद्र कौर ने बताया कि नवनीत के पिता स्व. सरदार नरेंद्र सिंह एक छोटे व्यवसायी थे। जिन्हे पिलिया ने जकड़ रखा था। गंभीर होने पर लगातार तीन महीने तक उनका इलाज चला। इस दौरान जमा पूंजी भी पानी की तरह बहाया गया, लेकिन वे नहीं बच पाए। इसके बाद संघर्ष की कहानी शुरू हुई।

अब तक 10 बार नेशनल खेल चुकी है नवनीत
हाॅकी खिलाड़ी नवनीत कौर ने बताया कि वे अबतक 2 बार पंजाब में, 1 बार भोपाल में, 1 बार केरला में और 6 बार रांची में कुल 10 बार नेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी है। उन्होंने बताया कि इसमें 3 बार सीनियर हाॅकी टीम में खेली है, अबतक का अंतिम मैच रांची में सीनियर टीम में रहकर खेली है।

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