खेतीबारी:जिले में 34193 हेक्टेयर में हुई रिकाॅर्ड 11.96 लाख क्विंटल गेहूं का उत्पादन

गौतम कुमार | खगड़ियाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
खलिहान में जमा तैयार गेंहू की ढ़ेर(फाइल फोटो)। - Dainik Bhaskar
खलिहान में जमा तैयार गेंहू की ढ़ेर(फाइल फोटो)।
  • 2020 से गेहूं का उत्पादन बढ़कर 2022 में 3500 केजी प्रति हैक्टेयर हुआ

सात नदियों से घिरे खगड़िया जिले में मक्का के बाद किसान गेहूं की खेती भी पूरी ताकत से कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले तीन साल में जिले में न केवल गेहूं फसल का आच्छादन क्षेत्र बढ़ा है, बल्कि पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में जिले में गेहूं आच्छादन के क्षेत्र में 6,341 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। जबकि उत्पादन में भी रिकार्डतोड़ बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों में अनुसार तीन साल में गेहूं का आच्छादन 27852 हजार हैक्टेयर से बढ़कर 34193 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यानी गेहूं का आच्छादन 6,341 हेक्टेयर में बढ़ा है। वहीं गेहूं का उत्पादन 3132 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर से बढ़कर 3500 किलोग्राम तक पहुंच गया है। यानी प्रति हैक्टेयर 368 किलोग्राम पैदावार में बढ़ोतरी की गई है। इस दफा जिले में आच्छादन के विरूद्ध 11 लाख 96 हजार 755 क्विंटल गेंहूं उपज होने का अनुमान है। हालांकि अब भी जिले के काफी किसान सिर्फ मक्के की खेती पर ही आश्रित हैं। जबकि खगड़िया के किसान मक्का की खेती करना ज्यादा श्रेयस्कर मानते हैं। क्योंकि बाढ़ आने के बाद भी किसानों को मक्का के फसल का खरीदार तो मिल जाता है, लेकिन गेहूं का खरीदार खोजने से भी नहीं मिलता है। बाढ़ के कारण कुछ इलाके में फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है इस बार गेहूं आच्छादन के क्षेत्र में वृद्धि हुई, लेकिन आच्छादन क्षेत्र के अनुसार पैदावार में बेहतर बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस सवाल पर जिला कृषि अधिकारी शैलेश कुमार बताते हैं कि इस रबी फसल में बाढ़ प्रभावित इलाके में पैदावार में कमी हुई है। हालांकि इस बार ओलावृष्टि काफी कम रही है। लेकिन, बाढ़ के कारण कुछ इलाके में फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ है।

किसानों ने कहा- मक्का की जगह अब वैकल्पिक खेती मजबूरी
मक्का आधारित उद्योग की स्थापना नहीं होने के कारण किसान अब वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। चौथम के विनय कुमार ने कहा कि छह एकड़ में मक्के की खेती की थी। लेकिन पैदावार आशा के अनुरूप नहीं हुआ है। दूसरी तरफ मक्के का कोई खरीददार भी नहीं था। ऐसे में वैकल्पिक खेती के रूप में गेहूं की खेती की। किसान संघ के नेता धीरेंद्र सिंह टुड्डू ने बताया कि खगड़िया के किसानों को अगर कृषि विभाग सभी सुविधा उपलब्ध करा दे तो किसान कुछ भी उपजा लेंगे। लेकिन किसानों को कृषि विभाग से कोई मदद ही नहीं मिलता है। खेती के समय खाद की किल्लत हो जाती है। इसके अलावा और भी समस्याएं हैं।

अच्छादन क्षेत्र में हुई वृद्धि तो पैदावार भी बढ़ा
इस बार गेहूं आच्छादन के क्षेत्र में वृद्धि हुई तो आच्छादन क्षेत्र के अनुसार पैदावार में बेहतर बढ़ोतरी हुई है। जिले में अधिकतर किसान अब गेहूं की खेती करना शुरू किए है। यहीं कारण है कि इस बार गेहूं का आच्छादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे किसानों को वैज्ञानिक विधि से गेहूं की खेती करनी चाहिए।
- शैलेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, खगड़िया।

खबरें और भी हैं...