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ये सिस्टम का अंधेरा है...:पहले लगने में 3 वर्ष 9 माह में तीसरी बार शहर की स्ट्रीट लाइटें खराब

द्रवेश कुमार | खगड़िया2 महीने पहले
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खराबी आने के कारण बंद पड़ा स्ट्रीट लाइट। - Dainik Bhaskar
खराबी आने के कारण बंद पड़ा स्ट्रीट लाइट।
  • एलईडी लाइट की योजना फिसड्डी , ईईएसएल कंपनी ने नप क्षेत्र में सभी बिजली के पोल पर लगाई हैं लाइटें

जिले के शहरी क्षेत्र में एलईडी लाइट की योजना फिसड्डी साबित हो गई है। ईईएसएल कंपनी ने शहर के विभिन्न हिस्सों में जितनी लाइटें लगाई गई हैं, उसमें से आधे से अधिक लगने के 15 दिनों में ही खराब हो गए। काफी पत्राचार के बाद करीब 8 महीने बाद लाइटें ठीक हुई तो फिर 1 महीने के अंदर दूसरी बार शहर के विभिन्न वार्डों में लगाए गए एलईडी लाइट आधे से अधिक खराब हो गई है। तीसरी बार फिर लाइट खराब होने से शाम में शहर में अंधरे जैसे हालात उत्पन्न हो जा रहे हैं। नौ माह में तीन बार स्ट्रीट लाइट खराब हो गई। दरअसल ये अंधेरा वार्डों में नहीं बल्कि ये सिस्टम का अंधेरा है। शहर के बलुआही ठाकुरबाड़ी, एमजी मार्ग, चित्रगुप्त नगर, राजेंद्र नगर समेत अन्य जगहों पर लगे किसी लाइट के स्विच जल गए। इस कारण लाइटें नहीं जल रही हैं। जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र में सभी विद्युत पोल पर एलईडी लाइट लगाई जानी थी, जिसे पूरा तो कर लिया गया, लेकिन अब उसके खराब हो जाने पर विभाग महीने तक उसकी मरम्मत नहीं कर रहे हैं। इससे शहर के अधिकांश भागों में रात्रि के समय अंधकार छाया रहता है और अंधेरे में असमाजिक तत्वों का आतंक बढ़ गया है। असामाजिक तत्व अंधेरा का फायदा उठाकर अक्सर राह चलते राहगीरों से छीनने व लूटने की घटना को अंजाम देते हैं और बड़ी आसानी से लोगों के नजरों से बच निकलते हैं। आलम यह है कि अब अंधेरी गलियों से गुजरने वाले लोगों को हमेशा छिनतई व अन्य अनहोनी का डर सताते रहता है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों नगर परिषद क्षेत्र में नगर विकास एवं आवास विभाग पटना ने ईईएसएल कंपनी द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने का काम किया। एक तो विभागीय एग्रीमेंट के तीन साल बाद लाइट लगाना शुरू किया गया। अब खराबी आने पर उसकी मरम्मत नहीं हो पा रही है।

खराब होने पर 8 माह बाद कराया ठीक, एक माह में फिर अधिकांश लाइटें हुईं खराब
शहर में लगाई गई स्ट्रीट लाइटों में आधे से अधिक खराब हैं। योजना में क्वालिटी का ध्यान नहीं रखा गया। इससे स्पष्ट होता है कि योजना में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ है।
- अभय कुमार गुडूडू, जिलाध्यक्ष जन अधिकार युवा परिषद खगड़िया।

लाइट लगाने के 8 महीने में ही कई जगह दूसरी तो कई जगह तीसरी बार लाइटें खराब हुईं है। निश्चित रूप से योजना में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है, इस कारण रात्रि में लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तो मेंटनेंस के 7 वर्ष के एग्रीमेंट के 3 साल बाद लाइटें लगाई गईं और खराब होने पर 8 महीने बाद ठीक करवाया गया, फिर भी शहर के अधिकांश हिस्सों में लाइटें खराब है।
रणवीर कुमार, निवर्तमान वार्ड पार्षद खगड़िया

लाइट लगाए जाने के बाद लाइट का खराब हो जाना सुरक्षा और सुविधा दोनों रूप से घातक है। विभाग को ध्यान देना चाहिए ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
नागेंद्र सिंह त्यागी, सामाजिक कार्यकर्ता

ईईएसएल कंपनी द्वारा शहर में लगाई गई स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता जांच को लेकर कार्यपालक पदाधिकारी को पूर्व में निर्देश दिया गया था। शहर के मुख्य मार्ग सहित सभी वार्ड में लगाए गए 40 से 50 प्रतिशत लाइट बंद होने की शिकायत लगने के 5 महीने बाद ही दूसरी बार मिलने लगी। मैं स्वयं इसे सही पाया।
सीता कुमारी, निवर्तमान सभापति खगड़िया

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