आस्था:कार्तिक पूर्णिमा पर नेपाल के बराह क्षेत्र रवाना होंगे श्रद्धालु

फारबिसगंज/ किशनगंजएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पहाड़ों से घिरा नेपाल का बराह क्षेत्र। - Dainik Bhaskar
पहाड़ों से घिरा नेपाल का बराह क्षेत्र।
  • कार्तिक पूर्णिमा, इसी स्थान पर कोसी हिमालय से नीचे उतरती है और वहां से आगे नदी भारतीय क्षेत्र के सुपौल के वीरपुर पहुंचती है

वैसे तो नेपाल की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक भारतीयों पर निर्भर करती है। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन नेपाल को कुछ ज्यादा ही राजस्व की प्राप्ति होती है। अनुमान के मुताबिक भारतीय क्षेत्र के कम से कम दो लाख लोग बराह क्षेत्र पहुंचते हैं। जिनमें महिलाओं की भी बड़ी संख्या होती है।जिसको लेकर सोमवार को देर संध्या भक्तों का जत्था नेपाल के लिये रवाना होगा।बताया जाता है कि जोगबनी सीमा से बराह क्षेत्र तक आने जाने के लिए तीन से चार सौ खर्च आती है। लेकिन हर एक लोगों को कम से कम डेढ़ हजार रुपए खर्च आती है। जबकि हजारों ऐसे लोग होते हैं जो चार से पांच हजार रुपए तक खर्च करते हैं। लगभग हर एक वर्ष बराह क्षेत्र जाने वाले भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आलोक कुमार भगत ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन औसतन 60 से 70 करोड़ भारतीय नोट यहां के लोग नेपाल में खर्च आते हैं। जिसमें नेपाल के हजारों लोगों का रोजगार भी जुड़ा होता है।

बेटी रोटी के संबंध रखने वाले पड़ोसी राष्ट्र भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के करीब
बेटी रोटी के संबंध रखने वाले पड़ोसी राष्ट्र भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के करीब भारत व नेपाल आध्यात्म के जरिए भी दिल से जुड़े हुए हैं। जो कई धार्मिक स्थल सीमावर्ती ग्रामीणों की आपसी प्रगाढ़ता का कारण बनते हैं। जिसका एक उदाहरण है विष्णु का स्वरूप बराह छेत्र। इसके समीप कोसी नदी हिमालय से नीचे जमीन पर उतरती है। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल लगने वाले इस मेले में बिहार के कोसी क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना व कोसी स्नान करते हैं। इसी स्थान पर कोसी नदी हिमालय से नीचे जमीन पर उतरती है और वहां से ये नदी भारतीय प्रभाग के बीरपुर पहुंचकर कोसी बराज में कैद हो जाती है। यहां कार्तिक की पूर्णिमा के रोज से भव्य मेला लगता है। कहा जाता है कि दैत्य हिरण कश्यप से रक्षा के लिए देवतागण ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी।

नेपाल में कुंभ के स्नान से मशहूर कोसी में बाराह क्षेत्र, दूरदूर से आते हैं श्रद्धालु
नेपाल में कुंभ के स्नान से मशहूर कोसी में स्नान कर लाखों श्रद्धालु भगवान नारायण के दशावतार बराह क्षेत्र का दर्शन करते हैं। नेपाल के सुनसरी जिला अंतर्गत चतरा के पहाडिय़ों के बीच बराह क्षेत्र में बहने वाली सप्त कोसी नदी में स्नान करेंगे। नेपाल के पवित्र स्थलों में एक बराह क्षेत्र जोगबनी से विराटनगर होते हुए लोग चतरा गद्दी पहुंचते हैं। चतरा गद्दी से पांच से छह किलोमीटर दूर पहाडिय़ों पर चलना पड़ता है। हालांकि सुगम रास्ता हो जाने के बाद से अधिकांश लोग वाहन से ही मंदिर तक पहुंच जाते हैं। लेकिन हजारों श्रद्धालु पैदल ही चलकर मंदिर तक पहुंचते हैं। संध्या के पांच बजे के बाद रात भर चतरा गद्दी में लोगों का जमावड़ा होता है। उसके बाद वहां से लोग मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं।ें वहां की प्राकृतिक छटा मन मोह लेती है।

खबरें और भी हैं...