मदर्स-डे पर विशेष:बाल विवाह की पीड़ा खुद झेल चुकी, अब गांवों में महिला उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ लड़ रहीं लड़ाई

अमित झा | ठाकुरगंज16 दिन पहले
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  • ममता तेरे रूप अनेक, मां अपने कर्तव्यों से समाज के सामने स्थापित कर रहीं आदर्श

मां बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित व स्नेहिल आंचल की छांव। बच्चों की प्रथम पाठशाला उनका घर तो प्रथम शिक्षिका मां ही होती है। जिसके स्नेह का मोल अनमोल होता है। यही कारण है कि मां का अर्थ सिर्फ जन्म देने तक सीमित नहीं है, मां नारी जगत का सम्मान है जिन्होंने अपने बच्चों संग समाज को उज्ज्वल भविष्य देने के लिए कई बलिदान दिए हैं। आठ मई को मातृ दिवस मनाया जाता है। यह मां के प्रति सम्मान व आदर व्यक्त करने का दिन है। हालांकि मां के प्रति सम्मान व आदर देने का कोई दिन, समय व घंटा निश्चित कर पाना मुश्किल है, पर मातृ दिवस पर हमने ऐसी ही कुछ माताओं से बात की जिन्होंने अपने कर्म से समाज में विशेष स्थान बनाया है।

आज मातृ दिवस पर मां के प्रति सम्मान व आदर व्यक्त करने का दिन, देश के सभी मां के लिए न तो कोई दिन, समय व घंटा निश्चित, मदर्स-डे पर कुछ मताओं ने भास्कर से अपनी-अपनी बातें साझा की

रेखा देवी : प्रखंड के बेसरवाटी पंचायत के वार्ड नंबर 10 निवासी रेखा देवी (50)। जो बाल विवाह की पीड़ा स्वंय झेली और अब विगत सात-आठ वर्षों से बाल विवाह, महिला उत्पीड़न, अत्याचार से आधी आबादी को निजात दिलाने हेतू संघर्षरत हैं। गांव-गांव जाकर कपड़े बेचती है। इसी क्रम में जीविका समूह से जुड़कर आधी आबादी को कुप्रथाओं से आजादी दिलाने के लिए अभियान चला रही हैं। शुरू में इन्हें शासन-प्रशासन से सहयोग नहीं मिला।

नीतू नखत: नीतू नखत गृहिणी हैं। तीन बेटियों की मां हैं और बेटा-बेटी एक समान संदेश का अलख समाज में जगा रही हैं। तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिला रही हैं साथ ही अन्य को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। बताती हैं कि बेटा हो या बेटी, मां के लिए सभी प्यारी होती हैं। क्योंकि दोनों एक समान है। आज भी समाज में कहीं-कहीं बेटियों से अधिक बेटों को महत्व दिया जाता है। जो बिल्कुल गलत है। शिक्षा, खेल, सुरक्षा संग अन्य क्षेत्रों में जिस तरह बेटियां अपने परिवार संग देश का नाम रोशन कर रही है।

मीरा देवी: महामारी काल में जांच या टीकाकरण हेतू लोगों के बीच जागरूकता व श्रेष्ठ कार्य हेतू सम्मानित हो चुकी मीरा देवी मरीजों के लिए भी ममतामयी स्नेह रखती हैं। ठाकुरगंज अस्पताल में वर्ष 2019 से एएनएम पद पर तैनात हैं। मीरा देवी का कहना है कि आने वाला हरेक मरीजों को संतान की तरह सेवा और देखभाल की जरूरत होती है। उसके लिए क्या अच्छा क्या खराब है यह समझाते हुए इलाज में सहयोग करती हैं। मरीज उनके व्यवहार के कायल हो जाते हैं।

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