वर्षा जल को संरक्षित कर होगी सिंचाई:12 पंचायतों में 20 माइक्रो वाटर शेड से 6255 एकड़ में होगी सिंचाई

लखीसराय2 महीने पहलेलेखक: अभिनंदन कुमार
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वर्षा जल से सिंचाई पर निर्भर जिले के किसानों को सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिकार संपन्न बनाने के लिए भूमि संरक्षण विभाग ने महत्वपूर्ण योजना तैयार की है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल छाजन विकास कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के तहत वैसे क्षेत्र जहां संसाधन के अभाव में सिंचाई नहीं हो पाती है। उन क्षेत्रों में भूमि संरक्षण विभाग जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगा।

योजना में लखीसराय जिले के एकमात्र सूर्यगढ़ा प्रखंड के 12 पंचायतों की 6 हजार 255 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। इस व्यवस्था के लिए 13 करोड़ 76 लाख 10 हजार करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। इस योजना में 20 माइक्रो वाटरशेड भी बनेंगे। जिला कृषि पदाधिकारी जिला भूमि संरक्षण के उप निदेशक भरत प्रसाद सिंह ने बताया कि वैसे क्षेत्र जहां संसाधन के अभाव में किसानों को सिंचाई की समस्या होती है उन क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार सिंचाई के संसाधन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। डीएम से अनुमोदन होने के बाद योजना पर काम शुरू किया जाएगा।

उपनिदेशक ने बताया कि या पंचवर्षीय योजना है। योजना को क्रियान्वित करने के लिए 12 पंचायतों में जहां का रकबा ज्यादाहोगा वहां जल छाजन समिति गठित होगी। समिति प्रदूषण नियंत्रण, संसाधनों के अति शोषण को कम करना, जल भंडारण, बाढ़ नियंत्रण और साधन की जांच, वन्य जीव संरक्षण, कटाव नियंत्रण और मिट्टी की रोकथाम, नियमित जलापूर्ति के लिए भूजल स्तर को बनाए रखना, आदि की मॉनिटरिंग करेगी। समिति के पदेन अध्यक्ष मुखिया होंगे और वहां एक सचिव का चयन किया जा रहा है। हालांकि सचिव के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस के चयन के लिए बीकॉम, बीएससी या बीए ऑनर्स अभ्यर्थी का होना जरूरी है। बीकॉम वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दिया जाएगा।

सरकार दे रही 75 फीसदी अनुदान
योजना का लाभ उन किसानों को दिया जा रहा है जिनके पास अपनी खुद की कृषि योग्य भूमि है और जल संसाधन होगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए कृषि में विस्तार होगा। उत्पादकता में वृद्धि होगी जिससे अर्थव्यवस्था का पूर्ण विकास होगा। सरकार की ओर से 75% अनुदान दिया जा रहा है। जिससे ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई योजना का फायदा भी किसानों को मिलने लगेगा।

जल संकट से निपटने की तैयारी है वाटर शेड प्रबंधन
बढ़ती जनसंख्या की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए जल का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहा है। जिसके कारण भू सतह पर मौजूद जल के साथ ही भूजल का स्तर नीचे गिरता जा रहा है। तेजी से बढ़ रहे औद्योगिकीकरण के फलस्वरूप पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ने के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे ग्लेशियर के रूप में जमा मीठा जल बड़े पैमाने पर पिघल कर समुद्र के खारे पानी में मिल रहा है।

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