अनियमितता:नप के क्रय में घालमेल, 50 लीटर की डस्टबिन खरीदी, वाउचर में कीमत दिखाई 120 लीटर वाली

लखीसराय9 दिन पहले
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सड़क किनारे लगा स्टील डस्टबिन का डस्टबिन। - Dainik Bhaskar
सड़क किनारे लगा स्टील डस्टबिन का डस्टबिन।
  • लखीसराय नप के प्रभारी ईओ ने 4 दिन में खर्च कर दिए लगभग 6 करोड़ रुपए
  • ट्रेनिंग से लौटे ईओ बोले- प्रभार वाले किसी भी अधिकारी को नीतिगत फैसला लेने का अधिकार नहीं

नगर परिषद लखीसराय में ईओ के एक महीने की छुट्टी पर जाते ही भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचा गया। इसका खुलासा तब हुआ जब भास्कर ने नप में डस्टबिन खरीद की पड़ताल की और इसके तहत तक पहुंचे। दरअसल, नगर परिषद ने अप्रैल माह में जैम पोर्टल से 500 स्टील और 66 ट्राली वाली डस्टबिन की खरीदारी की। इसमें नप ने 120 लीटर वाली स्टील की डस्टबिन के दाम पर 50 लीटर वाली स्टील की डस्टबिन की खरीदारी कर ली। यानी नप ने कागज पर 120 लीटर वाली स्टील का क्रय किया लेकिन शहर में सड़क के किनारे 50 से 60 लीटर क्षमता वाली स्टील की डस्टबिन लगा दी। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हमने खरीदारी वाले वॉचर की जांच की और एक्सपर्ट से शहर में लगी डस्टबिन की क्षमता के संबंध में जानकारी हासिल की। बता दें कि नप ने वाउचर संख्या- 235 के माध्यम से 1 करोड़ 44 लाख 25 हजार रुपए का भुगतान किया गया।

अवलोकन के बाद होगी नियमानुकूल कार्रवाई

ट्रेनिंग से लौटे नप ईओ आशुतोष आनंद चौधरी ने कहा कि प्रभार वाले किसी भी अधिकारी को नीतिगत फैसला लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके ट्रेनिंग अवधि में प्रभारी ईओ द्वारा जिस मद में भुगतान किया गया है। पहले इसका अवलोकन करेंगे फिर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। ईओ ने कहा कि लखीसराय पहला ऐसा उदाहरण है। जहां प्रभारी ईओ ने नीतिगत फैसला लिया गया है।

प्रभारी ईओ ने 4 दिन में खर्च कर डाले 5 करोड़ रुपए
नगर परिषद के प्रभारी ईओ यानी कार्यपालक पदाधिकारी ने 4 दिनों में 5 करोड़ 39 लाख 47 हजार 81 रुपए खर्च कर दिए। प्रभारी ईओ के 27 दिनों के कार्यकाल में कुल 8 करोड़ 87 लाख 652 रुपए खर्च किया है। लखीसराय नप ईओ आशुतोष आनंद चौधरी 6 अप्रैल से एक महीने के लिए ट्रेनिंग पर गए थे। बड़हिया नप ईओ मनीष कुमार लखीसराय के प्रभार में थे। 9 अप्रैल को नगर एवं आवास विभाग ने उन्हें वित्तीय प्रभार दिया। यानि 10 अप्रैल से 6 मई तक नप के खजाने से 8 करोड़ 87 लाख 652 रुपए की निकासी विभिन्न योजना मद में की। अप्रैल में 3 करोड़ 47 लाख 53 हजार 571 रुपए और मई के शेष 4 दिनों में 5 करोड़ 39 लाख 47081 रुपए खजाना से निकले। 1 मई को मजदूर दिवस और 3 मई को ईद की छुट्टी थी। इस प्रकार मात्र 4 दिनों में ही नगर परिषद का खजाना खाली हो गया।

जल्दबाजी में खरीदी गई डस्टबिन:सभापति
आपूर्तिकर्ता पैंथर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लिमिटेड को 120 लीटर क्षमता वाली स्टील डस्टबिन की आपूर्ति करनी थी, लेकिन एक्सपर्ट की राय में आपूर्ति की गई स्टील डस्टबिन की क्षमता मुश्किल से 50- 60 लीटर की होगी। एक जूनियर इंजीनियर की माने तो जो स्टील डस्टबिन की खरीद की गई है। यह मानक से आधी क्षमता से ज्यादा की नहीं है। वार्ड पार्षदों ने डस्टबिन में भारी गड़बड़ी की आशंका जताई है। नप के उप सभापति सुनील कुमार की माने तो जल्दबाजी में डस्टबिन का क्रय किया गया है। इसमें गड़बड़ी हुई है। कुछ योजना मद में सही तौर पर भुगतान किया गया है।

ऐसे निकाली गई खजाने से राशि
भाउचर संख्या 339 से 28 लाख, वाउचर संख्या 340 से 1415400 लाख, वाउचर संख्या 341 से 1446150 लाख, वाउचर संख्या 334 से 14425000 करोड़ रुपये की निकासी की गई।

28 दिनों का रहा ईओ का कार्यकाल
प्रभारी ईओ का कार्यकाल महज 28 दिनों का रहा। बड़हिया नप के ईओ मनीष कुमार को लखीसराय नप ईओ के योगदान के 2 दिन बाद वित्तीय प्रभार दिया मिला। इस दौरान से गड़बड़ी हुई।

प्रभारी ईओ के कार्यकाल पर उठे सवाल
वार्ड 2 के पार्षद शिव शंकर राम, 9 की पार्षद मंजू देवी सहित कई वार्ड पार्षदों ने कम समय में प्रभारी ईओ के कार्यकाल पर सवाल उठाए है। खास कर डस्टबिन क्रय के मुद्दे पर पार्षदों ने कहा कि इसमें बड़े पैमाने पर राशि को गोलमाल हुआ है। इसकी जांच कराने की जरूरत है। नगर परिषद के टेंडर व अन्य कई मामले पटना हाई कोर्ट में लंबित है।

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