उदासीनता:‌50 करोड़ की जरूरत, लेकिन मात्र 1 कराेड़ उपलब्ध, 3356 लाभुकों के घर का सपना अधूरा

सुकेश राणा | मधेपुरा2 महीने पहले
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  • 3 फेज में पूरा होना है प्रधानमंत्री आवास योजना, अब तक पहले फेज का काम भी पूरा नहीं

प्रधानमंत्री आवास योजना के पेंडिंग पड़े कार्यों के लिए नगर परिषद को करीब 50 करोड़ रुपए की जरूरत है, लेकिन इस वक्त नगर परिषद के फंंड में इस योजना के लिए मात्र 1 करोड़ की राशि ही जमा है। अधिकारियों का कहना है कि कई महीनों से केंद्र की ओर से फंड नहीं आ रहा है। फंड नहीं आने के कारण परिषद क्षेत्र में इस योजना से बनने वाले 3356 लाभुकों के घर का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत 2017 में हुई थी, इसे 3 फेज में पूरा करना था, लेकिन फंड की कमी और अनियमितता के कारण अब तक पहले फेज में चयनित कई लाभुकों को भी पूरी किश्त नहीं मिली है। समस्या सिर्फ यह ही नहीं है, जब फंड होती है तब लाभुकों के कागजात की कमी से फंड वापस लौट जाती है। कई लाभुकों के पास जमीन से जुड़े कागज नहीं होते। जटिल प्रकिया और सरकारी शिथिलता के कारण वे वक्त पर कागज तैयार नहीं कर पाते और उनकी राशि वापस लौट जाती है। अधिकारियों का कहना है कि नगर परिषद का स्थगित होने के कारण समस्या और बढ़ गई है।

पहले फेज के 1012 लाभुकों मेें से 33 के पास कागजात नहीं
प्रधानमंत्री आवास योजना तीन फेज में होना है। फिलहाल तीसरा फेज चल रहा है। लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक पहले फेज की ही सभी किस्तें लाभुकों को नहीं मिली है। पहले फेज में 1012 लाभुकों का चयन किया गया था। जिसमें 33 के पास जमीन के कागजात नहीं रहने के कारण राशि को सरेंडर कर दिया गया और 979 को वर्क आर्डर दिया गया। इसमें से अब तक मात्र 136 ने कार्य पूरा किया है। इसमें कुछ ही ऐसे लाभुक हैं हैं जिनको तीसरी किस्त की राशि मिल चुकी है, बाकी को अब तक पहली या दूसरी ही मिली है।

बिना कागज जुटाए वार्ड सदस्य जोड़ देते हैं सूची में नाम
आवास योजना के समन्वयक नीतीश ने बताया कि जमीन के अपडेट नहीं होने के कारण लाभुकों को किस्त मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि शेष 3356 लाभुकों में से 1000 से ज्यादा लाभुकों के पास एलपीसी यानी भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र नहीं है। वार्ड पार्षद नाम कमाने के चक्कर में बिना पूरा कागज लिए या बनवाए ही नाम तो जोड़ देते हैं लेकिन एलपीसी बनवाना भूल जाते हैं। बंटवारा नहीं होने और नियम की जानकारी नहीं होने के कारण लाभुकों की ओर से यह समस्या आती है। ऐसे मामले में वार्ड पार्षद सारी गलती नगर परिषद पर थोपकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

सेकेंड फेज में 1436 लाभुकों का चयन
इसी तरह सेकेंड फेज में 1436 लाभुकों का चयन किया गया था, जिसमें कागजात नहीं रहने के कारण 50 की राशि सरेंडर कर दी गई। 1386 को वर्क आर्डर दिया गया। इस फेज में मात्र 44 ने निर्माण कार्य पूरा किया है। उसी तरह तीसरे फेज में 1298 को राशि आवंटित हुई थी, जिसमें से 127 की राशि सरेंडर हो गई और 1171 को वर्क आर्डर दिया गया।

योजना में फंड का अभाव है। उपलब्ध राशि के अनुसार क्रमवार फंड निर्गत किया जा रहा है। जो लाभुक राशि के उठाव के बाद भी निर्माण नहीं कराए हैं, उन पर कार्रवाई होगी।
अमीत कुमार, ईओ, मधेपुरा नगर परिषद।

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