पिछले साल से 3 अंक पीछे पहुंचा मधेपुरा:प्राइवेट स्कूलों के छात्रों में विषय के प्रति आत्मविश्वास हुआ कम

सुकेश राणा | मधेपुरा7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
स्कूलों में पढ़ते छात्र(फाइल फोटो)। - Dainik Bhaskar
स्कूलों में पढ़ते छात्र(फाइल फोटो)।
  • नेशनल अचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट में आया सामने
  • सर्वे में 153 स्कूल, 593 शिक्षक व 3616 छात्र हुए थे शामिल
  • लड़के से ज्यादा लड़कियों में आया आत्मविश्वास, रिपोर्ट से अभिभावकों की चिंतजा बढ़ी

नेशनल एचीवमेंट सर्वे 2021 में जिले में गुणवत्ता शिक्षा के बदतर हो हालात में सुधार नहीं हो रहा है। शिक्षा विभाग का तकनीकि सेल भले ही ऑल इज वेल कह रही है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में 3 अंक नीचे आने के बावजूद सुधार नहीं दिख रहा है। मजेदार बात है कि यह स्थिति सरकारी स्कूल के साथ-साथ नीजि स्कूलों पर भी लागू हो रहा है। सर्वे के अनुसार सरकारी स्कूल भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में पीछे नजर आ रही है। मालूम हो कि इसी साल मई के अंतिम सप्ताह में नेशनल एचीवमेंट सर्वे 2021 (एनएएस)की रिर्पोट प्रकाशित किया था। तीन माह के बाद शिक्षा विभाग इसका आकलन कर रहा है। मालूम हो कि पिछले साल एनएएस ने रेंडमली 153 सरकारी व प्राइवेट स्कूल, 593 शिक्षक व 3616 छात्र पर सर्वे कराया गया था। जिसमें वर्ग 3 और 5 की स्थति में थोड़ी सुधार हुई। वहीं वर्ग 8 और 10 की स्थिति में सुधार की जगह तीन अंक और कम हुआ है। इसमें ज्यादातर प्राइवेट व कुछ सरकारी भी शामिल है। सर्वे में प्राइवेट स्कूल की खराब स्थिति की रिर्पोट से निश्चित रूप से अभिभावकों की चिंता बढ़ा देगी वहीं सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता शिक्षा में सुधार के दावा पर भी प्रश्न चिन्ह लग जाएगा।

कोरोना ने घटाया छात्रों का आत्मविश्वास
संभाग प्रभारी बताते हैं कि सर्वे के अनुसार, कोरोना के चलते छात्रों के सीखने की क्षमता पर असर पड़ा है। वहीं 80 फीसदी का मानना है कि स्कूल नहीं जाने से छात्रों के पढाई पर फर्क पड़ा था। कोविड महामारी के कारण बच्चों के पढ़ने-लिखने की क्षमता में भी काफी गिरावट आई है।

10वीं और 8वीं के बच्चों के मुकाबले तीसरी और पांचवीं के बच्चों में सीखने की क्षमता बेहतर
नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सहित बच्चों में सीखने की क्षमता को परखने के लिए देशभर में कराए गए सर्वेक्षण में दसवीं और आठवीं के बच्चों के मुकाबले तीसरी और पांचवीं के बच्चों में सीखने की क्षमता ज्यादा बेहतर पाई गई है। संभाग प्रभारी मो. शदाब ने कहा कि सर्वे का रिर्पोट के आधार पर हमलोग विगत दो माह से आकलन कर रहे हैं। इसको लेकर शिक्षकों को ज्यादा से ज्यादा मेंटल व प्रैक्टिकल वर्क करने को कहा है।

प्रत्येक तीन साल में कराई जाती है सर्वे
संभाग प्रभारी ने बताया कि स्कूली बच्चों के सीखने की क्षमता को जांचने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रत्येक तीन साल में एक सर्वे कराया जाता है। इससे पहले इस तरह का सर्वे 2017 में हुआ था। इसके बाद 2020 में होना था। लेकिन कोरोना के कारण यह सर्वे पिछले साल हुआ था। इनमें सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूल शामिल थे। इसमें जिले में 3616 छात्रों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस पूरी प्रक्रिया में 593 शिक्षक लगाए गए थे।

राज्यस्तर पर आधुनिक भाषा में 38वां, भाषा में 34वां व विज्ञान में 35वां स्थान

सर्वे के अनुसार वर्ग 8 के छात्र भाषा का जिला में 43 वां, गणित में 37वां, विज्ञान में 38 तथा सामाजिक अध्ययन में 40वां स्थान पाया है। राज्यस्तर पर भाषा में 49 वां, गणित में 38वां, विज्ञान में 39 तथा सामाजिक अध्ययन में 40वां स्थान पाया है। वहीं देश स्तर पर देखा जाए तो भाषा में 53वां, गणित में 36वां, विज्ञान में 39 तथा सामाजिक अध्ययन में 39वां स्थान पाया है। उसी तरह वर्ग 10 के आधुनिक भाषा में 34, भाषा का जिला में 32 वां, गणित में 30वां, विज्ञान में 32 तथा सामाजिक अध्ययन में 40वां स्थान पाया है। राज्यस्तर पर आधुनिक भाषा में 38, भाषा में 34 वां, गणित में 33वां, विज्ञान में 35 तथा सामाजिक अध्ययन में 26वां स्थान पाया है। वहीं देश स्तर पर देखा जाए तो आधुनिक भाषा में 41, भाषा में 32वां, गणित में 35वां, विज्ञान में 37 तथा सामाजिक अध्ययन में 43वां स्थान पाया है।

शिक्षकों को नई जिम्मेदारी दी जा रही है
सर्वे के आधार पर हमलोग इसका आकलन कर रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों को नई जिम्मेदारी दी जा रही है। उम्मीद है कि कुछ बेहतर होगा।
जयशंकर प्रसाद ठाकुर, डीईओ

खबरें और भी हैं...