पूर्णिया की रूपम के जज्बे को सलाम:हाथों से है दिव्यांग, पैरों से लिखती है; नेट की परीक्षा किया पास

मधेपुरा10 दिन पहले

पूर्णिया जिले कि रूपम कुमारी जन्म से ही अपने दोनों हाथों से दिव्यांग है। बावजूद उन्होंने हार नहीं माना। उन्होंने देश की बड़ी परीक्षाओं में शुमार नेट की परीक्षा पास किया और अभी वर्तमान में भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से हिंदी विषय से पीएचडी कर रही हैं। रूपम की शनिवार को पीएचडी 2020 के कोर्स वर्क की परीक्षा संपन्न हुई है।

जन्म से ही अपने पैर के पंजे की मदद से लिखती आ रही रूपम
रूपम कुमारी के दोनों हाथ नहीं है। लेकिन पढ़ाई के जुनून में इस छात्रा ने हाथ के स्थान पर पैरों से लिखना सीखकर अपनी दिव्यांगता को पीछे छोड़ दिया है। रूपम कुमारी शनिवार को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय द्वारा ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में आयोजित पीएचडी-2020 के कोर्स वर्क की परीक्षा दाएं पैर से लिखकर दीं। रूपम, पति सुरेंद्र प्रसाद शर्मा एवं एक वर्षीय बेटी पीहू प्रिया के साथ परीक्षा सेंटर पर पहुंचीं थीं। छात्रा के इस हौसले को देखते हुये कॉलेज के प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं अन्य लोग भी चकित थे।

रूपम कुमारी के दोनों हाथ नहीं है।
रूपम कुमारी के दोनों हाथ नहीं है।

पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की
रूपम ने दुर्गा उच्च विद्यालय से वर्ष 2009 में 10वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने इंटर में अपना नामांकन पूर्णिया महिला कॉलेज पूर्णिया में करवाया। वहीं से उन्होंने स्नातक भी पास किया। इसके बाद उन्होंने पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। व्यवसायिक बहादुर साह एवं चांदनी देवी की बेटी रूपम जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग है। उसने स्थानीय स्कूल से पढ़ाई शुरू की। शनिवार को यह छात्रा बीएनएमयू के पीएचडी-2020 के कोर्स वर्क की परीक्षा देने के लिये ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय आई थी। छात्रा रूपम ने बताया कि वह पूर्णिया जिला के बनमनखी के सामान्य व्यवसायिक बहादुर साह एवं चांदनी देवी की बेटी एवं निजी शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद शर्मा की पत्नी हैं।

रूपम कुमारी के पति, माता-पिता, मायका व ससुराल के सदस्य उनका पूरा ध्यान रखते हैं।
रूपम कुमारी के पति, माता-पिता, मायका व ससुराल के सदस्य उनका पूरा ध्यान रखते हैं।

माता-पिता बहुत परेशान थे
रूपम कुमारी ने बताया कि उनके पति, माता-पिता समेत मायका व ससुराल के अन्य सदस्य भी उनका पूरा ध्यान रखते हुए पढ़ाई में पूरी सहायता करते हैं। छात्रा ने बताया कि जन्म से उसके दोनों हाथ न होने के कारण माता-पिता बहुत परेशान थे। लेकिन छात्रा के कहने पर परिजनों ने उसे स्थानीय स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा। उसका नतीजा यह है कि वह वर्ष 2019 में नेट क्वालिफाइड कर लिया और आज बीएनएमयू में पीएचडी-2020 के कोर्स वर्क की परीक्षा दे दी है। छात्रा रूपम कुमारी ने बताया कि मैं अपने माता-पिता व पति पर बोझ नहीं बनना चाहती हूं। इसलिए वह पढ़ लिखकर वह अच्छी नौकरी करना चाहती है।

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