कार्यक्रम:श्रीमद्भगवद्गीता से सब ले सकते हैं प्रेरणा: माधव

मधेपुरा2 महीने पहले
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कार्यक्रम में मौजूद प्रधानाचार्य व अन्य अतिथि। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम में मौजूद प्रधानाचार्य व अन्य अतिथि।
  • स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत टीपी कॉलेज में ऑनलाइन-आॅफलाइन गीतादर्शन पर संवाद

श्रीमद्भगवद्गीता एक जीवन-ग्रंथ है। इसमें जीवन जीने की कला बताई गई है। इससे हम तनाव-प्रबंधन, समय-प्रबंधन, जीवन-प्रबंधन आदि की सीख ले सकते हैं। दुनिया के सभी युवा इस ग्रंथ से प्रेरणा ले सकते हैं। यह बात राजबोध फाउंडेशन लंदन (इंग्लैंड) के निदेशक माधव तुरुमेला ने कही। वे रविवार को बीएनएमयू के दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित युवाओं के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश विषयक संवाद में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित स्टडी सर्किल योजना के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आइसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचन्द्र सिन्हा ने कहा कि भगवद्गीता एक संपूर्ण एवं सार्वभौमिक ग्रंथ है। इसमें संपूर्ण मानव जाति के ज्ञान-विज्ञान का सार निहित है। हम इसका जितना ही अधिक अध्ययन एवं मनन करते हैं, हमें इसका उतना अधिक लाभ प्राप्त होता है। मुख्य अतिथि दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) के पूर्व अध्यक्ष सह अखिल भारतीय दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जटाशंकर ने कहा कि गीता मात्र एक धर्म-ग्रंथ नहीं, बल्कि एक जीवन-ग्रंथ भी है। इसका प्रत्येक श्लोक (मंत्र) जीवन में उतारने लायक है। इसके बताए मार्ग पर चलकर ही हम दुनिया को बचा सकते हैं।
जीवन की सभी समस्याओं का समाधान : दर्शनशास्त्र विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर-गढ़वाल की पूर्व अध्यक्ष डॉ. इंदु पांडेय खंडुरी ने कहा कि गीता संपूर्ण विश्व के लिए नीति-निर्देशक है। इसके संदेश केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि सभी लोगों के लिए अनुकरणीय हैं। डॉ. अविनाश कुमार श्रीवास्तव (नालंदा) ने कहा कि श्रीकृष्ण ने युवाओं को अतीत के मोह एवं भविष्य की चिंता से मुक्त होकर वर्तमान में कर्म करने का संदेश दिया है। अतिथियों का स्वागत एवं संचालन दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्षा सह दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्षा प्रो. (डॉ.) पूनम सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन टीपी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में प्रधानाचार्य डॉ. कैलाश प्रसाद यादव, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. केपी यादव, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष शोभा कांत कुमार आदि ने सहयोग किया।

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