अर्द्धवार्षिक परीक्षा परिणाम:बिना किताब पढ़े दी परीक्षा, दो साल पहले के मुकाबले 81-100% अंक लाने वाले 6.8% बढ़े

सुकेश राणा | मधेपुरा2 महीने पहले
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  • कोरोना काल में मात्र 4.38% काे मिला था ए ग्रेड, इस साल का आंकड़ा 11.23%
  • भास्कर एक्सक्लूसिव : परीक्षा में 367045 छात्र शामिल हुए थे

बिना किताब पढ़े ही दो साल बाद जिले में सभी प्राइमरी स्कूलों में हुई अर्द्धवार्षिक परीक्षा में बच्चों ने लंबी छलांग लगाई है। कोरोना काल से पहले के परिणाम पर गाैर करें ताे ए ग्रेड पाने वाले छात्राें की संख्या महज 4.38 फीसदी थी, जाे इस बार बढ़कर 11.23 फीसदी हो गई। अक्टूबर में बिना किताब पढ़े जिले के सभी प्राइमरी स्कूलों में वर्ग 1 से 8 तक की कक्षा के छात्रों की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में 367045 छात्र शामिल हुए थे। इसमें 11.23% ने ए ग्रेड, 45.01% ने बी ग्रेड, 36.53% ने सी ग्रेड, 6.5% ने डी ग्रेड तथा 0.72% ने ई ग्रेड से पास किया। दो साल पहले यानी अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन 2019-20 में 4.38% को ए ग्रेड, 37.97% को बी ग्रेड, 47.76% को सी ग्रेड, 8.59% को डी ग्रेड और 1.29% को ई ग्रेड मिला था। इस तरह से देखा जाए तो एक ग्रेड में यानी 81 से 100 अंक लाने वाले में 6.85% का इजाफा देखा गया।

बिना किताब पढ़े परीक्षा में शामिल हुए थे विद्यार्थी
अर्द्धवार्षिक परीक्षा में भी छात्र बिना किताब पढ़े के ही परीक्षा दिए थे। अक्टूबर से पहले सभी छात्राें काे किताब खरीदने के लिए राशि दी गई थी, लेकिन 90 फीसद से अधिक बच्चों ने किताब खरीदी ही नहीं। जानकारों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में मांग कर पढ़ने व स्व अध्ययन की परंपरा इस बार भी परीक्षा में अपना असर दिखाया। मालूम हो कि इस बार परीक्षा कॉपी की जांच संकुल के बदले स्कूलों में ही किया गया था। हालांकि इस रिजल्ट पर कुछ लोग प्रश्न भी उठा रहे हैं। समाजसेवी गरिमा उर्विसा कहती है कि एक तो दो साल स्कूल बंद रहा। उस पर बच्चों ने जहां परीक्षा दिया, वहीं जांच किया गया। इसमें कुछ घालमेल जरूर है। एक तो बच्चे को पुस्तक नहीं मिला। पढ़ाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। फिर इतना बेहतर रिजल्ट होना अपने आप में एक विषय है।

कोरोना काल : अधिक होम स्टडी का मिला फायदा, बच्चे हुए मजबूत
शिक्षाविद विरेन्द्र यादव का कहना है कि कोरोना काल में शिक्षण केंद्र बंद रहने के कारण बच्चों घरों में रहे। इस दौरान बच्चे के साथ-साथ अभिभावकों को भी ज्यादा ध्यान देने का मौका मिला। बच्चे आंतरिक रूप से मजबूत हुए। इस पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए जीवछपुर मिड्ल स्कूल के एचएम जीवन ज्योति का कहना है कि कोरोना काल में नुकसान ज्यादा निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का हुआ। कम संसाधन में पढ़ रहे सरकारी स्कूल के बच्चे अभिभावक केें तालमेल से आंतरिक रूप से मजबूत हुए।

पुस्तक मिलने के बाद रिजल्ट और बेहतर होगा
अर्द्धवार्षिक परीक्षा में छात्रों को बेहतर रिजल्ट उत्साहजनक है। उम्मीद है कि अगले सत्र से पुस्तक मिलने के बाद और भी बेहतर रिजल्ट होगा।
-अभिषेक कुमार, डीपीओ, एसएसए, मधेपुरा

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