डीएलएड के द्वितीय वर्ष का सत्र शुरू:गुरु-शिष्य परंपरा नई पीढ़ियों के लिए उदाहरण बने: प्राचार्य

मधेपुरा2 महीने पहले
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डायट में कार्यक्रम का उद्घाटन करते प्राचार्य व अन्य। - Dainik Bhaskar
डायट में कार्यक्रम का उद्घाटन करते प्राचार्य व अन्य।
  • नवनियुक्त व्याख्याताओं और प्रशिक्षुओं का स्वागत व परिचय कराया

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान(डायट) में डीएलएड के 2021-23 के द्वितीय वर्ष का सत्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सभी नवनियुक्त व्याख्याताओं एवं प्रशिक्षुओं का स्वागत तथा परिचय उत्सवी माहौल में कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य निशांत गुंजन के द्वारा की गई। जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमित कुमार ने किया। मौके पर प्राचार्य ने सभी प्रशिक्षुओं का हौसला अफजाई करते हुए उन्हें अपने कर्तव्यों से अवगत कराया। उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षुओं से कहा कि आप द्रोणाचार्य की भूमिका में आ रहे हैं। ऐसे में खुद के अंदर अनुशासन व गंभीरता सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षकों का समाज में सबसे ऊंचा माना गया है। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परम्परा नई पीढ़ियों के लिए कैसे अनमोल बने, इस तर्क के कसौटी पर खड़ा उतरना है। गुरु अपने शिष्य को शिक्षा देता है या कोई विद्या सिखाता है। बाद में वहीं शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम चलता जाता है। यह परम्परा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है। गुरु-शिष्य की यह परम्परा ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में हो सकती है, जैसे- अध्यात्म, संगीत, कला, वेदाध्ययन, वास्तु आदि।

गुरु समाज सुधारक और मार्गदर्शक
प्राचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में गुरु की भूमिका समाज को सुधार की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक के रूप में होने के साथ क्रान्ति को दिशा दिखाने वाली भी रही है। सभी व्याख्याताओं ने भी छात्रों के अधिकार व कर्तव्य पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में व्याख्याता डॉ. अमरेश कुमार, ललन कुमार, संजीव कुमार, प्रीति कुमारी, सुषमा श्रेष्ठा, विद्याभूषण शर्मा, अभय कुमार, आलोक प्रकाश, दिनेश कुमार, मदन कुमार, कुमुद रंजन झा, नरेंद्र कुमार, खगेश कुमार, रजनीगंधा उपस्थित थे। प्रिया कुमारी व दीपशिखा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा प्रिंस कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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