टीपी कॉलेज परिसर में जागरुकता अभियान चलाया:बाजार जाते समय जूट या कपड़े का थैला रखें : प्रिंसिपल

मधेपुराएक महीने पहले
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टीपी कॉलेज परिसर में जागरुकता अभियान चलाते स्वयंसेवक। - Dainik Bhaskar
टीपी कॉलेज परिसर में जागरुकता अभियान चलाते स्वयंसेवक।
  • प्लास्टिक से मुक्ति के लिए शैक्षणिक संस्थाओं का योगदान अहम, पर्यावरण बचाने को रोक जरूरी

टीपी कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना के तृतीय इकाई की ओर से बुधवार को कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. स्वर्णमणि के नेतृत्व में पूरे कॉलेज कैंपस में प्लास्टिक मुक्त अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज परिसर में फैले प्लास्टिक व पॉलीथिन कचरे को एनएसएस स्वयंसेवकों व छात्रों ने एक जगह पर एकत्रित किया।

सब ने एक स्वर में शपथ लिया कि अपने जीवनकाल में प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे। पर्यावरण को बचाना है तो प्लास्टिक की आदत को छोड़ना पड़ेगा। बिहार सरकार द्वारा प्लास्टिक की थैलियों को बंद कर दी गई है। मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि प्लास्टिक मुक्त अभियान की जागरुकता के लिए शैक्षणिक संस्थानों की अहम भूमिका है।

लोगों को चाहिए कि वे बाजार जाते समय कपड़े या जूट का थैला अवश्य साथ रखें ताकि पॉलीथिन के बढ़ते प्रयोग की गति को धीमा किया जा सके। यदि हमने प्लास्टिक व पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक नहीं लगाई तो भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को निश्चित ही दुष्परिणाम भुगतने होंगे।

प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहा नुकसान : डॉ. नरेश
बीएनएमयू के आइक्यूएसी डायरेक्टर सह माय बर्थ, माय अर्थ के संयोजक प्रो. नरेश कुमार ने कहा कि प्लास्टिक से इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर और पर्यावरण को भी खासा नुकसान हो रहा है।

इसके विकल्प के रूप में कपड़े, कागज और जूट के बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। डॉ. स्वर्ण मणि ने कहा कि प्लास्टिक का उपयोग आज के समय में हर जगह पर किया जा रहा है। हम इंसानों ने ही प्लास्टिक का आविष्कार किया है, लेकिन इंसानों की इस गलती के कारण सभी को इसका अंजाम भुगतना पड़ रहा है। हम जानते हैं कि प्लास्टिक कभी सड़ता नहीं है।

आज के समय मे बहुत अधिक मात्रा में लोग प्लास्टिक का उपयोग करते हैं। टीपी कॉलेज के परीक्षा नियंत्रक बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि जब हम कहीं बाहर घूमने के लिए जाते हैं तो दुकान से पानी पीने के लिए प्लास्टिक बोतल खरीदते हैं, और उस बोतल का पानी पीते हैं, फिर बोतल फेंक देते हैं।

हमें घर से ही मेटल की बोतल में पानी लेकर जाना चाहिए, ताकि प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल कम से कम हो। इस अवसर पर अनेक लोग मौजूद थे।

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