धर्म-कर्म:भागवत में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म व वामन अवतार की सुनाई कथा

आलमनगर7 दिन पहले
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कथा स्थल पर प्रवचन करते रविंद्र कृष्ण शास्त्री सरस जी महाराज व मौजूद श्रोता। - Dainik Bhaskar
कथा स्थल पर प्रवचन करते रविंद्र कृष्ण शास्त्री सरस जी महाराज व मौजूद श्रोता।
  • आलमनगर के पानी टंकी मैदान में नौ दिवसीय भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हो रहा आयोजन, उमड़े श्रद्धालु

थाना चौक स्थित पानी टंकी मैदान परिसर में पितृपक्ष के अवसर पर नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयाेजन किया गया है। आठवें दिन कथावाचक रविंद्र कृष्ण शास्त्री सरस जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म उत्सव, वामन अवतार, गोवर्धन पूजा सहित अन्य कई अवतारों का चर्चा की। इस दौरान जीवंत झांकियों के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। पूरा पंडाल नंद के घर आनंद भयो व जय कन्हैया लाल की.. के उद्घोष से गूंज उठा। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय सभी श्रोता झूमने और नाचने लगे। सुमधुर भजनों के साथ कथा श्रवण करने भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। वामन अवतार की कथा में बताया कि भगवान ने राजा बलि से दान में तीन ही पग मांगा। प्रभु ने पहले पग में राजा बलि का मन नापा तो दूसरे में पूरी सृष्टि यानी धन को नाप दिया। जब तीसरे पग की बारी आई, तो राजा बलि भी मूक हो गए। तब उनकी पारी आगे आई और राजा बलि को अपना तन भगवान को अर्पित कर देने की बात कही। इस तरह राजा बलि ने तन, मन व धन भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। श्रीराम कथा का वर्णन करते हुए कथावाचक ने मनुष्य को उनके जीवन चरित्र का अनुसरण करने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान श्रीरामचरित मानस के दोहों व चौपाइयों का संक्षेप में वर्णन करते हुए उसका सार बताया।

धर्म की स्थापना को होता है प्रभु का अवतार
कथावाचक ने वामन अवतार की लीला के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पाप बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मथुरा में राजा कंस के अत्याचार से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रूप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। उन्होंने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह अवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करेंगे। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान भगवान कृष्ण व वासुदेव की संजीव झांकी से श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रोताओं ने भगवान का पूजन कर ने माखन मिश्री का भोग लगाया। इस मौके पर महिला पुरुषों ने नंदोत्सव पर जमकर नृत्य किया।

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