धर्म-कर्म:भगवान के जन्म व वामन अवतार की सुनाई कथा

आलमनगर16 दिन पहले
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कथा स्थल पर मौजूद श्रोता। - Dainik Bhaskar
कथा स्थल पर मौजूद श्रोता।
  • आलमनगर के पानी टंकी मैदान में नौ दिवसीय भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हो रहा आयोजन,

थाना चौक स्थित पानी टंकी मैदान परिसर में पितृपक्ष के अवसर पर नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयाेजन किया गया है। आठवें दिन कथावाचक रविंद्र कृष्ण शास्त्री सरस जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म उत्सव, वामन अवतार, गोवर्धन पूजा सहित अन्य कई अवतारों का चर्चा की। इस दौरान जीवंत झांकियों के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। पूरा पंडाल नंद के घर आनंद भयो व जय कन्हैया लाल की.. के उद्घोष से गूंज उठा। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय सभी श्रोता झूमने और नाचने लगे। सुमधुर भजनों के साथ कथा श्रवण करने भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। वामन अवतार की कथा में बताया कि भगवान ने राजा बलि से दान में तीन ही पग मांगा। प्रभु ने पहले पग में राजा बलि का मन नापा तो दूसरे में पूरी सृष्टि यानी धन को नाप दिया। जब तीसरे पग की बारी आई, तो राजा बलि भी मूक हो गए। तब उनकी पारी आगे आई और राजा बलि को अपना तन भगवान को अर्पित कर देने की बात कही। इस तरह राजा बलि ने तन, मन व धन भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया।

पाप बढ़ने पर धर्म की स्थापना के लिए प्रभु लेते हैं अवतार
कथावाचक ने वामन अवतार की लीला के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पाप बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मथुरा में राजा कंस के अत्याचार से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रूप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह अवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा, जब बताए मार्ग पर चलेंगेे।

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