विवि:‘मनोविज्ञान की उपयोगिता विश्वव्यापी आधुनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका’

मधेपुरा2 महीने पहले
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व्याख्यान में मौजूद छात्र-छात्राएं। - Dainik Bhaskar
व्याख्यान में मौजूद छात्र-छात्राएं।
  • बीएनएमयू के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में हुए व्याख्यान में प्रो. ध्रुव ने कहा-

बीएन मंडल विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में शनिवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में एलएनएमयू, दरभंगा के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव कुमार मुख्य वक्ता के रूप में और प्रो. अनीस अहमद विशेष वक्ता थे। बीएनएमयू के पूर्व नोडल पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एमआई रहमान ने की। अपने अभिभाषण में प्रो. ध्रुव कुमार ने छात्र-छात्राओं के साथ मनोविज्ञान के विस्तृत कार्य क्षेत्र की चर्चा की। उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान की उपयोगिता विश्वव्यापी है और आज के आधुनिक जीवन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरोना काल के बाद मनोवैज्ञानिकों की जिम्मेवारी बहुत अधिक बढ़ गई है।
कोरोना काल के बाद बढ़ी मनोवैज्ञानिकों की महत्ता
मनोवैज्ञानिक जीवन के मार्ग दर्शक के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। कोरोना काल के बाद व्यावहारिक संबंधों में कटुता, अवसाद, तनाव, हीन भावना आदि स्पष्ट देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि अब भारत सरकार भी इस बात पर जोर दे रही है कि अस्पतालों में मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति की जाए। विदेश में अपनी सेवा दे चुके ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक प्रो. अनीस अहमद ने कहा कि मनोविज्ञान मानव व्यवहार का अध्ययन करना सिखाता है। मानव को बेहतर ढंग से समझने के लिए मनोविज्ञान ही मात्र एक विषय है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना ही नहीं होना चाहिए, अपितु हमें दक्षता प्राप्त करने के लिए उत्सुक होना पड़ेगा। मनोविज्ञान के क्षेत्र में जहां नौकरी की असीम संभावनाएं हैं। मानव उत्थान और सामाजिक कल्याण मनोवैज्ञानिकों द्वारा ही संभव है।
कौशल होगा तो चलकर आएगी नौकरी : प्रो. रहमान
अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. रहमान ने छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए उन्हें अपने कर्तव्य के पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का युग दक्षता का युग है, यदि हम विद्यार्थी जीवन में तपस्या करेंगे तो आगे हमारे लिए मीठे फल हैं। हमें पूर्णतः अपनी शिक्षा प्राप्ति के लिए एक मजबूत इरादे की आवश्यकता है और यह तभी संभव है जब हम अध्ययन और अध्यापन में लीन रहेंगे। हमारे अंदर कौशल होगा तो नौकरी हमारे पास चल कर आएगी। डॉ. अशोक कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को अपनी मनोदशा और मनोबल को ऊंचा रखने की सीख दी। उन्होंने कहा कि हारते वही हैं, जो लड़ते हैं और जीतते भी वही हैं जो कौशलपूर्ण तरीके से लड़ते हैं। कार्यक्रम के अंत में गेस्ट फैकल्टी डॉ. सिकंदर कुमार ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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