शारदीय नवरात्र:देवधा में 112 वर्षों से मां दुर्गा की 7 पिंडिंयाें की होती है पूजा अर्चना, माता की पिंडियां शक्तिपीठ के नाम से विख्यात हैं

मधुबनी2 महीने पहले
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देवधा मंे स्थापित माता की पिंडी। - Dainik Bhaskar
देवधा मंे स्थापित माता की पिंडी।
  • मां के दर्शन-पूजन के लिए नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु, दूर तक फैली हुई है ख्याति

जयनगर बॉर्डर क्षेत्र में दुर्गा पूजा की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। देवधा बॉर्डर के पास भगवती चौक पर स्थित पौराणिक दुर्गा मंदिर को भी आयोजक नया लुक देने में जुटे हैं। मंदिर के गर्भ गृह में दुर्गा मां की सात पिंड स्थित है। देखने से प्रतीत होता है कि माता दुर्गा की सात पिंड एक विशेष मिट्टी से बनी है। बॉर्डर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए माता की पिंडी शक्ति पीठ के नाम से विख्यात है। खासकर नवरात्र में श्रद्धालु यहां आना नहीं भूलते हैं। बॉर्डर पार करके नेपाल से भी हजारों श्रद्धालु माता के पिंड रूप का दर्शन और पूजा करने के लिए आते हैं। आश्विन की दुर्गा पूजा में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ यहां उमड़ती है। यहां कलश स्थापना के साथ ही पिंड रूपी देवी के दर्शन व पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। पूजा काे लेकर जाेरशाेर से तैयारी चल रही है।

मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी हाे रहा आयाेजन, लौटेगी रौनक
देवधा उत्तरी पंचायत के पूर्व मुखिया योगेंद्र पूर्वे ने बताया कि करीब 112 सालों से अधिक समय से यहां विधि-विधान के साथ माता दुर्गे की 7 रूपी पिंड की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से देवी रूपी पिंडी की पूजा अर्चना करते हैं, उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होता है। भक्तों की मन्नत यहां पूरी होती है। आयोजक ने बताया कि दो साल के बाद इस साल आश्विन दुर्गा पूजा बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। भव्य मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हाे रहा है। श्रद्धालुओं को माता के दर्शन में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो, इसको लेकर सारी आवश्यक तैयारी क्रमबद्ध ढंग से की जा रही है।

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