खेल:मां ने खेलने का मौका दिया तो रेसलिंग में जीता मेडल

मधुबनी9 दिन पहले
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  • मां के सपने को पूरा कर एसएसबी में भी की नौकरी

हर सफल महिला के पीछे मां का हाथ होता है। अगर मां नहीं होती तो घर की दहलीज को पार कर महिलाएं सपनों काे साकार नहीं कर पाती। रूढ़ीवादी बंदिशों, सामाजिक ताना-बाना, ऊंच-नीच, पारिवारिक मर्यादाओं की अड़चन समेत न जाने कितने ही प्रकार की समस्याओं काे मां काे झेलना पड़ता है तब जाकर उनकी बेटी समाज में अपनी पहचान बना पाती है। इसी का परिणाम है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले पीछे नहीं हैं। मातृ दिवस के अवसर पर ऐसी सभी मां के फौलादी इरादों को हम सलाम करते हैं जिन्होंने बेटियों को आसमान की ऊंचाई छूने का मौका दिया।

मां ने रेसलिंग में अव्वल आने का लिया था वचन : रेणु फोगट

हरियाणा के छोटे से जिले चरखी दादरी की रहने वाली रेणु फोगट ने बताया कि बचपन से रेसलिंग अच्छी लगती थी। सपनों के बारे में जब मां समझ गई तो उन्होंने मुझसे रेसलिंग में अव्वल आने का वचन लेते हुए खुद को साबित करने के लिए विदा किया। आज राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियाेगिता में मेडल जीतकर मैंने मां के सपने काे पूरा किया है। रेसलिंग के दौरान ही 2018 में एसएसबी की 25वीं वाहिनी में भी बहाली हो गई। सेना के कड़े नियमों के बीच दिन में 3 से 4 बार मां से बात न करूं तो दिन अधूरा लगता है।

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