वाटर हार्वेस्टिंग कहीं नहीं:4 लाख लीटर पानी को शुद्ध करने के लिए 8 लाख लीटर पानी बर्बाद

मोतिहारी8 दिन पहले
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आरओ प्लांट से गिराया जा रहा फिल्टर के बाद वेस्टेज पानी। - Dainik Bhaskar
आरओ प्लांट से गिराया जा रहा फिल्टर के बाद वेस्टेज पानी।
  • 100 से अधिक आरओ प्लांट का हो रहा संचालन

मोतिहारी शहर सहित जिले के सभी प्रखंडों में 100 से अधिक आरओ प्लांट से प्रतिदिन तकरीबन 4 लाख लीटर पानी जारों में भर कर बेचा जा रहा है। जबकि पानी को फिल्टर करने के क्रम में दोगुना 8 लाख लीटर पानी नालियों में बहाया जा रहा है। इस तरह एक महीने में हीं तकरीबन 2 करोड़ 40 लाख लीटर पानी आरओ प्लांट के द्वारा नालियों में बहा दिया जा रहा है। घरों में लगाए गए आरओ मशीन से भी लगभग एक करोड़ लीटर से अधिक पानी नालियों में बहा दिया जा रहा है। पर्यावरणविदों की माने तो अगर स्थिति ऐसी हीं रही तो आने वाले पांच वर्षों में भूगर्भ जल का लेवल 10 से 20 फीट नीचे जा सकता है।

आरओ प्लांट व घरों में लगाए गए आरो मशीन से निकले हाई टीडीएस के पानी के कारण भूगर्भ जल का टीडीएस भी बढ़ जा रहा है। पीएचईडी विभाग की माने तो शहरी क्षेत्रों में भूगर्भ जल 60 फिट तक का टीडीएस लेवल 1000 से भी अधिक हो गया है। जिसके कारण 60 फीट का पानी अब पीने लायक नही रहा। आरओ प्लॉट संचालक मो.मोअज्जम व पवन कुमार ने बताया कि एक लीटर पानी को शुद्ध करने में दो लीटर पानी वेस्टेज हो जाता है। इस तरह से 4 लाख लीटर को शुद्ध करने में 8 लाख लीटर बर्बाद हो रहा है।

मोतिहारी शहर में 40 आरओ प्लांट का हो रहा है संचालन

जिले में तकरीबन 100 आरो प्लांट का संचालन किया जा रहा है। जिसमें 40 मोतिहारी शहर में संचालित है। लेकिन, इसमें से किसी ने नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस नही लिया है। ऐसा नही है कि प्लांट के संचालन के बारे में नगर निगम को पता नही है। इसके बावजूद नगर निगम के द्वारा इन प्लांटों पर अभी तक कोई कार्रवाई नही हुई है। कॉमर्शियल की जगह डोमेस्टिक मीटर से हो रहा प्लांट का संचालन: आरओ प्लांट से काफी मात्रा में पानी की सप्लाई दी जाती है। लेकिन, प्लांट संचालक डोमेस्टिक मीटर में ही लोड बढ़ा कर बिजली विभाग को भुगतान करती है। किसी भी प्लांट में कॉमर्शियल मीटर नही लगाया गया है। जिसके कारण बिजली विभाग के राजस्व को भी चुना लगाया जा रहा हैं। बिजली विभाग के अधिकारी भी सब जानते हुए भी अनजान बने हुए है। शहर में चल रहे किसी भी आरओ प्लांट में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नही है।

^इतने अधिक मात्रा में भूगर्भ जल के दोहन से निश्चित रूप से वाटर लेवल घट जाएगा। पूरे विश्व में मात्र 2 से 2.5%फ्रेश वाटर है। इसमें में भी ग्राउंड वाटर 30%ही है। इदोहन से बचने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग बहुत जरूरी है। अपशिष्ट जल को रिसाइकिल कर घरेलू कार्य के अलावा अन्य कार्यों में इस्तेमाल करना होगा। नही तो भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन से कुछ दिनों के अंदर वाटर लेवल काफी नीचे चला जाएगा।
-डॉ. राजीव रंजन, एचओडी जियोग्राफी, एलएनडी कॉलेज मोतिहारी

^आरओ प्लांट पर कार्रवाई करने का अधिकार हमारे पास नहीं है। भूगर्भ जल दाेहन पर कार्रवाई का अधिकार प्रशासनिक स्तर पर है।
- ई.मनीष कुमार, कार्यपालक अभियंता पीएचईडी मोतिहारी
^आरओ प्लांट संचालकों के पास यदि लाइसेंस नहीं है तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-सुनील कुमार, ईओ, नगर निगम

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