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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:51 साल में 7 लाख की जलाशय योजना में खर्च हो गए 9 करोड़, फिर भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी

संतोष सहाय | मुंगेरएक महीने पहले
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यहीं पर बनना था सतघरवा जलाशय योजना, जो 51 साल में पूरा नहीं हुआ। - Dainik Bhaskar
यहीं पर बनना था सतघरवा जलाशय योजना, जो 51 साल में पूरा नहीं हुआ।
  • तघरवा जलाशय योजना के काम की रफ्तार ऐसी कि कछुआ भी शरमा जाए
  • इंजीनियर का तर्क पहाड़ों के दरारों के कारण जलाशय में पानी टिकता ही नहीं
  • विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद फिर किसानों को आस, स्लुइस गेट और मेन डैम की हो रही मरम्मत

मुंगेर में एक ऐसी जलाशय योजना है जो 51 वर्ष पूर्व 1971 में सात लाख की लागत से शुरू हुई। वर्ष 1977 में बनकर तैयार हुई, लेकिन इसका लाभ पांच पंचायतों के करीब पांच हजार किसानों की हजारों एकड़ जमीन को नहीं हुआ। 2004 में तत्कालीन विधायक उपेंद्र प्रसाद वर्मा के प्रयास से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पुन: सात करोड़ की लागत से योजना के पुनरुद्धार की खातिर शिलान्यास किया। इसके 18 साल बाद भी किसानों को योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पाया, जबकि इसकी लागत बढ़कर 09 करोड़ हो गई। जब-जब योजना पूर्ण हुई, तीन तरफ पहाड़ से घिरे खेतों के किसानों के चेहरे खिल उठे, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने का प्रयास विफल रहा। पानी जलाशय में ठहर हीं नही पाया। जांच के बाद अभियंताओं का दल तर्क देता रहा कि पहाड़ों में दरार के कारण पानी टिकता हीं नही। किसान कहते रहे कि अभियंता आते हैं। जांच करते हैं। लेकिन इन दरारों को भरने का प्रयास नहीं करते। अब एक बार स्थानीय विधायक ने इस मुद्दे को उठाया है तो फिर से इस पर काम शुरू होने की आस जगी है।

ऐसे समझें क्यों लगे इतने साल

1971 में सात लाख में रुपए की लागत से शुरू की गई थी सतघरवा जलाशय योजना

1977 में बनकर तैयार हुई योजना पर दो-तीन दिन में ही हो गया ध्वस्त

2004 में विधायक उपेंद्र प्र वर्मा के प्रयास से राबड़ी देवी ने दोबारा किया शिलान्यास

5000 किसानों को दिया जाना था लाभ अब एक बार फिर 5 पंचायतों के किसानों को जगी उम्मीद

किसानों ने कहा-पहाड़ी व झरने से गिरने वाला पानी दरारों में ही समा जाता है
1 किसान सह समाजसेवी अशोक कोड़ा कहते हैं कि ग्रामीणों का सारा प्रयास व्यर्थ जा रहा है। जब तक डैम की पूरी मरम्मत कर दरारों को भरा नहीं जाएगा, खेतों तक पानी पहुंचेगा कैसे। हालांकि योजना के स्लुइस गेटों सहित मेन डैम की मरम्मत का काम किया जा रहा है।

2 किसानों ने कहा कि पानी निकासी के लिए लगा गेट क्षतिग्रस्त होने से जलाशय का पानी केनाल के द्वारा खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। परियोजना से पानी की आस लगाए बैठे किसानों का कहना है कि जलाशय के फर्श का पक्कीकरण नहीं किए जाने से पहाड़ी व झरने से गिरने वाला पानी पहाड़ की दरारों में ही कही समा जाता है, जिसका पता नहीं चल पाया है।

पिछले पखवाड़े राज्यस्तरीय टीम ने की जांच, कहा-सरकार को सौंपेंगे रिपोर्ट
मृत पड़ी सतघरवा जलाशय योजना को पुनर्जीवित करने को लेकर राज्यस्तरीय टीम धरहरा पहुंची थी। जांच टीम में इंजीनियर इन चीफ पटना अशोक कुमार चौधरी, मुख्य अभियंता भागलपुर अनिल कुमार, जियोलॉजिस्ट पटना वीके शर्मा, मुख्य अभियंता मैकेनिकल पटना जयंत कुमार, कार्यपालक अभियंता पटना शैलेंद्र कुमार, कार्यपालक अभियंता, तारापुर रामजी चौधरी व अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग हवेली खड़गपुर ओम प्रकाश शामिल थे। जांच पड़ताल के बाद टीम ने बताया कि इसे बनाने में दो से तीन माह का समय लगेगा। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।

विधायक ने विधानसभा में सतघरवा जलाशय का मुद्दा उठाया, फिर हुई जांच
जमालपुर विधायक अजय कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने इस योजना के जीर्णोद्धार के लिए निवेदन समिति में आवेदन दिया। साथ ही विधानसभा में सतघरवा जलाशय को कारगर बनाने के लिए जांच की मांग की थी। इसके आलोक में सरकार ने एक टीम गठित कर जांच को भेजा।

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