चीनी-गुड़ की चाशनी से तैयार होते हैं खास खिलौने:हाथी-घोड़े, पक्षी समेत बनते हैं कई तरह के खिलौने, 70-80 रुपए प्रतिकिलो होती है बिक्री

मुंगेर2 महीने पहले

दीपों के त्योहार दीपावली में अब दो दिन शेष रह गये हैं। वैसे तो इस त्योहार में पूजन के साथ दीपावली की खुशियां बांटने के लिए बाजारों में कई तरह की मिठाईयां होती है। लेकिन जो मिठाई सिर्फ दीपावली के समय बनता है वह चीनी और गुड़ से बनता है। खासकर यह मिठाई अन्य मिठाई से हटकर होती है। वहीं कारोबारी भी 1 महीना पहले से ही यह चीनी के खिलौने बनाने में दिन-रात लगे हैं।

चीनी और गुड़ के रांह लकड़ी से बने फरमा के सहारे इस खिलौने को तैयार करते हैं। जिसमें दुकानदार के द्वारा हाथी-घोड़े व पशु-पक्षियों के अलावे फूल-पत्ती की आकारवाले ढाचे में चीनी के चासनी से इस मिठाई को बनाया जाता है।

आज के जमाने मे हर घर में मनाये जानेवाले दीपों के पर्व में इसकी मांग व खपत काफी बढ़ जाती है। मुंगेर के अम्बे चौंक निवासी कारीगर मनीष बताते हैं कि रंग-बिरंगे चीनी के चासनी को तैयार कर लकड़ी से बने ढांचे में खिलौने को आकार दिया जाता है । यह सांचा कई प्रकार के आकारों का होता है जैसे शेर , भालू मोर या अन्य प्रकार में खिलौने जिसे बच्चे खासा पसंद करते है। दीपों के पर्व पर चीनी का खिलौना महिलाओं की पहली पसंद है इस त्योहार पर हर घर में बनानेवाले घरौंदे में महिलाएं इस खिलौने से सजाती हैं और प्रसाद के रूप में इसे परिवार के सदस्य मुंह मीठा करते हैं।

वहीं व्यापारी इस खिलौने की खरीद मुंगेर के बाजारों से करते हैं और अन्य स्थलों पर बेचते है। इतना ही नहीं मुंगेर से यह मिठाई की खरीदारी कर दूसरे प्रदेश भी ले जाते हैं। दुकानदार ने बताया कि यह चीनी और गुड़ के चासनी से तैयार खिलौना बाजार में 70 से 85 रुपये प्रति किलो इसकी बिक्री होती है।

बता दें कि दीपावली में एक खास प्रकार की मिठाई बनाई जाती जो खासकर चीनी या गुड़ की बनती है जिसे चीनी का खिलौना या मिठाई भी कहते है। इसे बनाने को लेकर कारोबारी दिन-रात लगे हैं। हर घर में मनाये जानेवाले दीपों के पर्व में इसकी मांग व खपत काफी बढ़ गयी है। हाथी-घोड़े व पशु-पक्षियों के अलावे फूल-पत्ती की आकारवाले ढाचे में चीनी के चासनी से इस मिठाई को बनाया जाता है।

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